पटना में 10,476 आवारा कुत्तों की नसबंदी, 75 वार्डों में रेबीज रोकने की तैयारी, 99 लाख रुपये हुए खर्च

Patna Sterilization Stray Dogs : पटना नगर निगम आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने और रेबीज के प्रसार को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान चला रहा है. पिछले 10 महीनों में 10,476 कुत्तों पर यह प्रक्रिया की गई है. यह अभियान सभी 75 वार्डों में जारी है.

Patna Sterilization Stray Dogs : पटना नगर निगम ने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने और रेबीज के खतरे से बचाव के लिए बड़े स्तर पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू किया है. इस अभियान में संतुलित जीव कल्याण संस्था का सहयोग लिया जा रहा है. पिछले 10 माह में 10,476 कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण कराया जा चुका है. इस पूरी प्रक्रिया में अब तक करीब 99 लाख रुपये खर्च हुए हैं.

रोजाना 35 से 40 कुत्तों को पकड़कर अस्पताल लाया जा रहा

नगर निगम की टीम रोस्टर और आम लोगों की शिकायतों के आधार पर प्रतिदिन करीब 35 से 40 कुत्तों को पकड़कर रामचक बैरिया स्थित डॉग अस्पताल पहुंचाती है. अस्पताल में सर्जरी से पहले डॉक्टर कुत्तों की स्वास्थ्य जांच करते हैं. जांच में बीमार या गर्भवती पाए जाने वाले कुत्तों की नसबंदी नहीं की जाती और उन्हें उसी इलाके में वापस छोड़ दिया जाता है.

स्वस्थ कुत्तों की ही होती है सर्जरी

स्वास्थ्य जांच में फिट पाए जाने वाले कुत्तों को ही अस्पताल में भर्ती किया जाता है. इसके बाद नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और अन्य जरूरी उपचार की प्रक्रिया पूरी की जाती है. अभियान का उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ-साथ रेबीज संक्रमण के खतरे को कम करना है.

70 फीसदी कुत्तों का टीकाकरण जरूरी

राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत संक्रमण की रोकथाम के लिए किसी क्षेत्र में कम से कम 70 फीसदी कुत्तों का टीकाकरण जरूरी माना गया है. इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों में अभियान चलाया जा रहा है.

नगर निगम के अनुसार, नसबंदी का काम मान्यता प्राप्त संस्था के माध्यम से किया जा रहा है. इसके लिए प्रोजेक्ट रिकग्निशन सर्टिफिकेट जरूरी है. चार सदस्यीय समिति की निगरानी में पूरी प्रक्रिया की जाती है. नसबंदी के बाद प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड और कटे अंगों की गिनती की जाती है, जिसके बाद भुगतान किया जाता है.

एक सप्ताह तक अस्पताल में रखे जाते हैं कुत्ते

नसबंदी के बाद कुत्तों को करीब एक सप्ताह तक अस्पताल में रखा जाता है. इस दौरान उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन और डी-वॉर्मिंग की दवा देने के साथ पोस्ट-ऑपरेटिव केयर भी की जाती है. पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद कुत्तों को उसी इलाके में वापस छोड़ा जाता है, जहां से उन्हें पकड़ा गया था.

रोजाना होती है केनल और ऑपरेशन थिएटर की सफाई

डॉग अस्पताल में कुत्तों के रहने वाले केनल और ऑपरेशन थिएटर की रोजाना डीप क्लीनिंग की जाती है. कुत्तों को खाना देने के बाद परिसर की सफाई भी नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा की जाती है. इसका उद्देश्य संक्रमण के खतरे को कम करना और अस्पताल में रखे गए जानवरों को सुरक्षित रखना है.

शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

नगर निगम वार्ड स्तर पर अभियान चलाने के साथ आम लोगों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है. किसी इलाके में आवारा कुत्तों की समस्या होने पर नागरिक इन नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

शिकायत के लिए दूरभाष संख्या 0621-2200634, मोबाइल नंबर 9264447449 और टोल फ्री नंबर 155304 जारी किए गए हैं. शिकायत मिलने के बाद टीम संबंधित क्षेत्र में पहुंचकर कुत्तों को पकड़ने और टीकाकरण की कार्रवाई करती है.

75 वार्डों में अभियान जारी

पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ गौरव कुमार ने बताया कि पटना के सभी 75 वार्डों में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का अभियान जारी है. उन्होंने कहा कि संक्रमण की रोकथाम के लिए 70 फीसदी कुत्तों का टीकाकरण जरूरी है. जांच में स्वस्थ पाए जाने वाले कुत्तों को ही अस्पताल में भर्ती कर उनकी सर्जरी की जा रही है.

डॉ गौरव कुमार, पशु चिकित्सा अधिकारी, पटना नगर निगम- सभी 75 वार्डों में नसबंदी व टीकाकरण अभियान जारी है. संक्रमण रोकने के लिए 70 फीसदी कुत्तों का टीकाकरण जरूरी है. हालांकि, जांच में फिट पाए जाने वाले कुत्तों की ही अस्पताल में भर्ती कर सर्जरी की जा रही है.

आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित

नगर निगम का यह अभियान आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने और रेबीज संक्रमण के खतरे को कम करने पर केंद्रित है. आने वाले समय में 75 वार्डों में टीकाकरण और नसबंदी अभियान को जारी रखते हुए अधिक से अधिक कुत्तों को इसके दायरे में लाने का लक्ष्य है.

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लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

हिमांशु देव सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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