पटना से सुबोध कुमार नंदन की रिपोर्ट
Patna News: पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में 51 भव्य मंडप बनाए गए थे. प्रत्येक मंडप में आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ विवाह की सभी रस्में संपन्न कराईं. इससे पहले सभी वर-वधुओं ने मुख्य सभागार में एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया.
आकर्षक बारात बनी समारोह का केंद्र
समारोह से पहले 51 दूल्हों की भव्य बारात महाराणा प्रताप भवन से निकाली गई. घोड़ों पर सवार दूल्हों के साथ तीन बैंड पार्टियां, ढोल-ताशा दल और बीएसएफ बैंड ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया. रास्ते भर सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर बारात का स्वागत किया.
संगीत, हल्दी और मेहंदी से सजा आयोजन
विवाह से पहले संगीत, हल्दी और मेहंदी की रस्मों ने आयोजन को पारंपरिक रंगों से भर दिया. सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारिवारिक माहौल ने समारोह को और भी यादगार बना दिया.
8 हजार लोगों के लिए हुआ भव्य भोज
समारोह स्थल के बाहरी परिसर में करीब 16 हजार वर्ग फीट में विशाल पंडाल बनाया गया था. समिति के संयोजक कन्हैया अग्रवाल (कन्नू) ने बताया कि बारातियों, अतिथियों और आमंत्रित लोगों के लिए लगभग 8 हजार लोगों के स्वरुचि भोज की व्यवस्था की गई थी.
मैथिली ठाकुर और रितिका राज ने बांधा समां
कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद सदस्य एवं प्रसिद्ध लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने थैलेसीमिया को मात देने वाले बच्चों को सम्मानित किया. वहीं सारेगामा फेम गायिका रितिका राज ने अपने मधुर गीतों से समारोह में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया.
छह विशिष्ट हस्तियों को मिला सम्मान
समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले छह विशिष्ट व्यक्तियों को “मां वैष्णो देवी सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया. सम्मानित लोगों में पत्रकारिता, समाजसेवा, अध्यात्म, खेल, व्यवसाय और फिल्म जगत से जुड़े लोग शामिल रहे.
नवविवाहित जोड़ों को दिए गए उपहार
समिति की ओर से सभी नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक घरेलू सामग्री उपहार स्वरूप प्रदान की गई. वहीं श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में सजा मां वैष्णो देवी का भव्य दरबार भी आकर्षण का केंद्र बना रहा.
आयोजन की सफलता में कई लोगों का योगदान
समारोह को सफल बनाने में समिति के संस्थापक सदस्य मुकेश हिस्सारिया, अध्यक्ष जयप्रकाश अमिताभ, सचिव संजय तोतला, कोषाध्यक्ष प्रकाश अग्रवाल, संयोजक कन्हैया अग्रवाल (कन्नू), सह-संयोजक जितेंद्र कुमार (जित्तू) समेत कई पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
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