Patna Nagar Nigam Action : राजधानी पटना के रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम ने एक बार फिर कार्रवाई तेज कर दी है. करीब पांच साल पहले जिन इलाकों में नगर निगम ने आवासीय भवनों में चल रही दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई शुरू की थी, अब उन्हीं मामलों के साथ बड़ी संख्या में नए भवन भी जांच के दायरे में आ गए हैं. सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद नगर निगम ने शहर के 26,745 आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को चिन्हित कर नोटिस भेजा था. नोटिस मिलने के बाद भवन मालिक और अन्य संबंधित लोग जनसुनवाई में पहुंचकर अपना पक्ष रख रहे हैं.
दूसरे दिन जनसुनवाई में पहुंचे लोग
गुरुवार को नूतन राजधानी अंचल कार्यालय में जनसुनवाई के दूसरे दिन सुबह 10:30 बजे से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी. करीब 100 लोग अपनी शिकायत और दस्तावेज लेकर पहुंचे. हालांकि, इस दौरान नगर आयुक्त के मौजूद नहीं रहने के कारण विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी और लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई. करीब 300 आवेदन और संबंधित कागजात जमा किए गए.
कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार शर्मा ने बताया कि जमा दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी. लोगों को सुनवाई के लिए अगली तारीख भी दी गई है.
पांच साल पहले भी हुई थी कार्रवाई
नगर निगम ने करीब पांच साल पहले भी एसकेपुरी, पाटलिपुत्र कॉलोनी मोड़ समेत शहर के कई रिहायशी इलाकों में कार्रवाई की थी. उस समय करीब 500 आवासीय भवनों में चल रही दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नोटिस जारी किया गया था. निगम ने कई जगह सीलिंग की कार्रवाई भी शुरू की थी.
कोर्ट से मिल गया था स्टे
हालांकि, कार्रवाई के बाद संबंधित मकान मालिकों ने कोर्ट का रुख किया और स्टे ऑर्डर ले लिया. इसके बाद मामला लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सका. अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम ने इस मुद्दे को फिर से गंभीरता से लिया है. इस बार निगम आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को चिन्हित करने के साथ उनके संपत्ति कर रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है.
सभी को अभी नोटिस नहीं
नगर निगम के अनुसार पटना में बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं, जिनका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, लेकिन संपत्ति कर आवासीय श्रेणी में जमा किया जा रहा है. निगम ऐसे भवनों की पहचान कर रहा है. जिन लोगों तक अभी नोटिस नहीं पहुंचा है, उन्हें भी मुख्यालय स्तर से फोन कर सेल्फ असेसमेंट करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
निगम कर रहा चिन्हित
निगम की जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मकान मालिक अपने रिहायशी मकानों में दुकानें या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हैं. इनमें से कई मामलों को प्रॉपर्टी आईडी के आधार पर डिजिटल सूची में चिन्हित किया गया है. अब इन भवनों के वास्तविक उपयोग और जमा किए जा रहे टैक्स की स्थिति का मिलान किया जा रहा है.
पटना में 47.55 फीसदी जमीन आवासीय उपयोग के लिए तय
बिहार गजट में प्रकाशित पटना के आधिकारिक भूमि उपयोग के आंकड़े इस पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बनाते हैं. नगर निगम क्षेत्र के कुल 104.22 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 49.56 वर्ग किलोमीटर यानी 47.55 फीसदी हिस्सा केवल आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है.
इसके मुकाबले व्यावसायिक गतिविधियों के लिए महज 4.65 वर्ग किलोमीटर यानी 4.46 फीसदी क्षेत्र निर्धारित है. वहीं मिश्रित उपयोग के लिए 3.52 वर्ग किलोमीटर यानी 3.37 फीसदी क्षेत्र तय है. इसके बावजूद शहर की कई रिहायशी कॉलोनियों और गलियों में बड़ी संख्या में दुकानें और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं.
गजट के आंकड़ों के अनुसार पटना में खाली और कृषि भूमि का हिस्सा 18.40 फीसदी तथा मनोरंजक और खुले स्थानों का हिस्सा 3.20 फीसदी है. ऐसे में आवासीय इलाकों में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों ने शहर की मूल भूमि उपयोग व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.
जनसुनवाई में लोगों ने बताई अपनी परेशानी
नूतन राजधानी अंचल कार्यालय पहुंचे लोगों में कई ऐसे भी थे, जिन्होंने नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए. वार्ड नंबर 18 के रहने वाले अमित राज ने बताया कि उनका मकान केवल चार मंजिला है, लेकिन नगर निगम की ओर से उनसे छह मंजिला भवन के हिसाब से टैक्स वसूला जा रहा है. कमर्शियल गतिविधि को लेकर नोटिस मिलने के बाद जब वह अपना पक्ष रखने और टैक्स जमा करने पहुंचे, तब उन्हें इस गड़बड़ी की जानकारी हुई.
वहीं, शेखपुरा वार्ड नंबर 4 निवासी उपेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि करीब सात साल पहले उन्होंने घर का बंटवारा कराकर म्यूटेशन कराया था. उनके हिस्से का मकान पूरी तरह खाली है, लेकिन उन्हें भी व्यावसायिक गतिविधि को लेकर नोटिस मिल गया. उनका आरोप है कि आसपास के कई मकानों में लगातार दुकानें चल रही हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई.
दस्तावेजों की जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
नगर निगम की ओर से फिलहाल जनसुनवाई के जरिए भवन मालिकों और संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जा रहा है. लोगों से संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, टैक्स रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजात लिए जा रहे हैं. गुरुवार को करीब 300 आवेदन और दस्तावेज जमा किए गए.
कार्यपालक पदाधिकारी अजीत कुमार शर्मा के मुताबिक सभी दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी. रिकॉर्ड की जांच के बाद यह तय होगा कि संबंधित भवन का वास्तविक उपयोग क्या है और उसके अनुसार किस तरह की वैधानिक कार्रवाई की जानी है.
नगर निगम की यह कार्रवाई अब केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं रहने वाली है. आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों, संपत्ति कर और भूमि उपयोग के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है. ऐसे में आने वाले दिनों में और भी भवन मालिकों को नोटिस मिलने और कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
Also Read : 8 साल से फरार आरोपित पटना जंक्शन से गिरफ्तार, मुजफ्फरपुर में की थी डकैती; STF ने दबोचा
