Patna News: पटना में नलों से गंदा पानी आने की खबर सामने आने के बाद पटना नगर निगम हरकत में आ गया है. शहर के सभी वार्डों में जलापूर्ति व्यवस्था की सघन निगरानी शुरू कर दी गई है.
नगर आयुक्त के निर्देश पर अंचलों के कार्यपालक अभियंता, जूनियर इंजीनियर और जलापूर्ति शाखा के अधिकारी मौके पर जाकर जांच कर रहे हैं. साथ ही, पानी के नमूने एकत्र कर उनकी गुणवत्ता की जांच भी कराई जा रही है.
कंकड़बाग से उठा मामला, पूरे शहर में जांच
कंकड़बाग कॉलोनी के सेक्टर-बी में नलों से काला और बदबूदार पानी आने की खबर सामने आने के बाद यह मुद्दा गंभीर हो गया. खबर प्रकाशित होने के बाद नगर निगम ने तत्काल जांच शुरू कर दी. अधिकारियों की टीम शनिवार से ही विभिन्न इलाकों में पहुंचकर पानी के सैंपल कलेक्ट कर रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं जलापूर्ति में किसी तरह का प्रदूषण तो नहीं फैल रहा.
शुरुआती जांच में क्या निकला
नगर निगम की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि अब तक जिन इलाकों से सैंपल लिए गए हैं, उनमें पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई है. निगम का कहना है कि फिलहाल किसी भी वार्ड से गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है. हालांकि, अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल रिपोर्ट तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर रहकर स्थिति की निगरानी करें.
पाइपलाइन बदले बिना नहीं मिलेगा समाधान
पटना नागरिक परिषद के अध्यक्ष और कंकड़बाग निवासी कुमार अनुपम का कहना है कि केवल जांच से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. उनके मुताबिक, हर दिन सुबह करीब पांच बजे से दो घंटे तक मटमैला और भूरे रंग का पानी आता है. उनका दावा है कि जब तक पुरानी और जर्जर पाइपलाइनों को बदला नहीं जाएगा, तब तक लोगों को राहत नहीं मिलेगी.
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है. निगम के अनुसार, नागरिकों को स्वच्छ, सुरक्षित और मानक अनुरूप पेयजल उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है. सैंपल कलेक्शन के दौरान स्थानीय लोगों से फीडबैक भी लिया जा रहा है, जो अब तक संतोषजनक बताया गया है.
पुरानी पाइपलाइनों पर नजर
नगर निगम का कहना है कि समय-समय पर सर्वेक्षण कर पुराने और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की पहचान की जाती है और जरूरत के मुताबिक उनका नवीनीकरण भी किया जाता है. नालों के पास से गुजर रही जलापूर्ति पाइपलाइनों की नियमित मरम्मत का काम भी जारी रहता है, ताकि सीवेज का पानी पेयजल में न मिले.
इंदौर जैसी स्थिति से बचाव की कोशिश
अधिकारियों का कहना है कि किसी भी कीमत पर पटना में इंदौर जैसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी. इसी कारण एहतियातन पूरे शहर में पानी की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे.
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