Patna News: (अजीत कुमार की रिपोर्ट) राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ अंतर्गत बेउर मोड़ से बेउर जेल जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे वर्षों से बना जलजमाव स्थानीय निवासियों के लिए नासूर बन चुका है. सड़क किनारे बने नाले के गलत तकनीकी निर्माण और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण आसपास की कॉलोनियों, खाली प्लॉटों और रिहायशी इलाकों में नरक जैसे हालात पैदा हो गए हैं. स्थिति यह है कि कई प्रमुख स्थानों पर गंदे पानी का तालाब बना हुआ है, जिससे लोगों का पैदल निकलना भी दूभर हो गया है. इस ड्रेनेज सिस्टम की खराबी के कारण इलाके में डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया समेत कई घातक संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है.
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बेउर जेल रोड स्थित पाटलिपुत्र सेंट्रल स्कूल के उत्तर दिशा में स्थित खाली जमीन में वार्ड संख्या-11 की ओर से नाले का गंदा पानी लगातार बैक मार रहा है. इस गंभीर समस्या को लेकर मोहल्लावासियों ने पूर्व में पटना नगर निगम के अपर नगर आयुक्त (सफाई) को लिखित आवेदन देकर गुहार लगाई थी, लेकिन नगर निगम के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी और हालात जस के तस बने हुए हैं.
घटिया ढाल के कारण खाली प्लॉटों में जमा हो रहा पानी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्य सड़क के किनारे नाला तो बना दिया गया, लेकिन उसका स्तर और ढाल सही नहीं रखा गया. नतीजतन, आसपास का पानी और कॉलोनियों का आउटलेट नाले में आगे बहने के बजाय निचले क्षेत्रों और खाली पड़े प्लॉटों में जमा हो रहा है. लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण वहां बड़ी-बड़ी झाड़ियां, जंगली घास और कूड़े-कचरे का अंबार लग गया है. गंदे पानी से चौबीसों घंटे उठने वाली तीखी दुर्गंध ने स्थानीय लोगों का जीना मुहाल कर दिया है और मच्छरों का भयंकर प्रकोप बढ़ गया है.
जलजमाव से उत्पन्न मुख्य समस्याएं:
- जल निकासी ठप होने से रिहायशी इलाकों में गंदा पानी घुसा.
- नालों पर फल, सब्जी और मछली दुकानदारों का अवैध अतिक्रमण.
- जलजमाव वाले स्थानों पर ही फेंका जा रहा है दुकानों का अपशिष्ट.
- मच्छरों के बढ़ने से संक्रामक बीमारियों का बढ़ा खतरा.
एजेंसी पर लगा था 10 लाख का जुर्माना, फिर भी नहीं सुधरे हालात
मोहल्लावासियों के अनुसार, मानसून और बरसात के दिनों में तो स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि सड़क और गड्ढों का फर्क ही मिट जाता है. सड़क किनारे बने गहरे गड्ढों और जलजमाव के कारण आए दिन राहगीर चोटिल हो रहे हैं. बीते वर्ष एक मोटरसाइकिल सवार पानी से भरे गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गया था. उस समय प्रशासनिक जांच के बाद दोषी निर्माण एजेंसी पर लगभग 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी ठोंका गया था, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर हालात में कोई सुधार नहीं देखने को मिला.
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने पटना नगर निगम और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस पूरे ड्रेनेज प्रोजेक्ट की तकनीकी जांच कराई जाए, नाले की खामियों को दूर कर आउटलेट को सुधारा जाए और नालों पर से अवैध अतिक्रमण हटाया जाए. स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने शीघ्र ही युद्धस्तर पर पंपिंग सेट लगाकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की, तो महामारी फैलने की स्थिति में लोग सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.
