Patna News: (शुभम कुमार) पटना सिविल कोर्ट (Patna Civil Court News) के एक जज से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के नाम पर घूस मांगने वाले एक शातिर साइबर ठग को पुलिस ने मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किया है. आरोपित खुद को मरवान का अंचलाधिकारी (सीओ) बताकर जज से अवैध राशि की मांग कर रहा था. जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठगी के पैसों से वह इंस्टाग्राम पर कॉमेडी वीडियो और रील्स बनाता था.
दाखिल-खारिज पेंडिंग होने का दिया झांसा
जानकारी के अनुसार, पटना सिविल कोर्ट (Patna Civil Court News) के जज के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को मरवान का सीओ मुकेश कुमार बताते हुए कहा कि उनका दाखिल-खारिज का मामला लंबित है और काम जल्दी कराने के लिए रुपये देने होंगे. अंचलाधिकारी के नाम पर घूस मांगने से जज को संदेह हुआ. इसके बाद उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से मरवान के वास्तविक सीओ का आधिकारिक नंबर निकाला और उनसे संपर्क किया. असली सीओ ने ऐसी किसी भी कॉल से इनकार कर दिया. इसके बाद जज ने 7 मई को कोतवाली थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई
DIU ने मुजफ्फरपुर से दबोचा
मामला न्यायिक अधिकारी से जुड़ा होने के कारण जांच डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट (District Intelligence Unit) को सौंपी गई। पुलिस ने मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लेकर तकनीकी जांच शुरू की, जिसमें आरोपित की लोकेशन मुजफ्फरपुर जिले में मिली. इसके बाद डीआईयू और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने मुजफ्फरपुर के तुर्की क्षेत्र स्थित बड़ा सवेरा गांव में छापेमारी कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया. उसकी पहचान प्रिंस यादव के रूप में हुई है.
सरकारी पोर्टल से निकालता था लोगों का डेटा
पुलिस पूछताछ में आरोपित ने कई अहम खुलासे किए। उसने बताया कि वह सरकारी भूमि पोर्टल से दाखिल-खारिज के लंबित मामलों से जुड़े लोगों के मोबाइल नंबर निकालता था. फिर संबंधित अधिकारी बनकर कॉल करता और काम जल्दी कराने के नाम पर 3 से 5 हजार रुपये तक वसूलता था. आरोपित ने स्वीकार किया कि वह अब तक 100 से अधिक लोगों को ठगी का शिकार बना चुका है. रकम कम होने के कारण अधिकांश लोग पुलिस में शिकायत नहीं करते थे.
ठगी के पैसों से बनाता था इंस्टाग्राम रील्स
जांच में यह भी सामने आया कि प्रिंस यादव सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था. ठगी से मिले पैसों का इस्तेमाल वह दोस्तों के साथ इंस्टाग्राम पर कॉमेडी वीडियो और रील्स बनाने में करता था. फिलहाल पुलिस ने आरोपित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है.
