Judicial Academy Development: बिहार न्यायिक अकादमी के आसपास अतिक्रमण हटाने के बाद फेंसिंग, हरित क्षेत्र और पार्क विकसित करने के काम में हो रही देरी पर पटना हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने सड़क निर्माण विभाग, वन विभाग तथा नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिवों को शुक्रवार, 11 सितंबर को सुबह 10.30 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. तीनों सचिवों को कोर्ट के समक्ष संबंधित विकास कार्यों की स्पष्ट और समन्वित कार्ययोजना के साथ उसकी समय-सीमा भी बतानी होगी.
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश सुधीर सिंह और न्यायमूर्ति राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बिहार न्यायिक अकादमी की ओर से दायर जनहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि यह मामला महज याचिकाकर्ता और राज्य सरकार के बीच विवाद नहीं है, बल्कि न्यायिक अकादमी के सुचारू संचालन, सुरक्षा, बेहतर वातावरण और व्यापक जनहित से जुड़ा है.
30 जून तक काम पूरा करने का था आश्वासन
सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि महात्मा गांधी सेतु के नीचे के हिस्से में फेंसिंग और हरित पौधारोपण का काम 30 जून 2026 तक पूरा करने का आश्वासन सड़क निर्माण विभाग की ओर से दिया गया था. इसके बावजूद निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ. हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि पूर्व में दिये गये आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है.
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पियूष लाल ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र में मुख्य रूप से न्यायिक अकादमी की उत्तरी सीमा की दीवार के विकास की जानकारी दी गयी है, जबकि पुल के नीचे पूर्वी हिस्से के विकास के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गयी है.
रिकॉर्ड में नहीं मिला शपथपत्र
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से कहा गया कि सड़क निर्माण विभाग के एनएच डिवीजन के कार्यपालक अभियंता ने पुल के नीचे के इलाके को विकसित करने का आश्वासन दिया था. हालांकि, कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि संबंधित कार्यपालक अभियंता की ओर से ऐसा कोई शपथपत्र रिकॉर्ड पर नहीं है, जिसमें इस संबंध में कोई आश्वासन या प्रस्तावित कार्य का उल्लेख हो.
जब अपर महाधिवक्ता-3 ने दोबारा दावा किया कि संबंधित विभाग की ओर से शपथपत्र दाखिल किया गया है, तो कोर्ट ने पूरे रिकॉर्ड की जांच करायी. जांच के बाद भी ऐसा कोई शपथपत्र रिकॉर्ड में नहीं मिला. इस पर कोर्ट ने कहा कि जब किसी दावे के समर्थन में कोई शपथपत्र रिकॉर्ड पर नहीं है, तो केवल मौखिक बयान के आधार पर आगे बढ़ना मुश्किल है.
महाधिवक्ता के हटने पर भी कोर्ट ने जतायी नाराजगी
रिकॉर्ड के बाहर जाकर दलील दिये जाने पर कोर्ट द्वारा सवाल उठाये जाने के बाद महाधिवक्ता एसडी संजय ने इस मामले में पेश होने से खुद को अलग कर लिया. आदेश में खंडपीठ ने कहा कि बिहार न्यायिक अकादमी और न्याय व्यवस्था से जुड़े जनहित के मामले में रिकॉर्ड से बाहर जाकर दलीलें दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है. हालांकि, कोर्ट ने इस संबंध में आगे कोई टिप्पणी करने से परहेज किया.
पार्क निर्माण की योजना तैयार
वन विभाग की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि अतिक्रमण हटाये गये स्थान पर पार्क निर्माण का अनुमान तैयार कर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को भेजा गया था. विभाग ने इसे प्रशासनिक स्वीकृति और आवश्यक राशि के आवंटन के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग को भेज दिया है. स्वीकृति और राशि मिलते ही पार्क का निर्माण शुरू करने की बात कही गयी है.
सड़क निर्माण विभाग ने भी बताया कि संबंधित कार्य के लिए शॉर्ट री-टेंडर जारी किया गया है. प्राप्त निविदा का मूल्यांकन चल रहा है और सफल न्यूनतम बोलीदाता को इसी महीने काम सौंप दिया जाएगा. विभाग ने काम पूरा करने के लिए दो महीने की समय-सीमा निर्धारित की है.
तीनों सचिवों से मांगी स्पष्ट कार्ययोजना
हाईकोर्ट ने अब तीनों विभागों के सचिवों को तलब कर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि न्यायिक अकादमी से जुड़े विकास कार्य महज आश्वासनों और विभागीय पत्राचार तक सीमित न रहें, बल्कि उनके लिए स्पष्ट जिम्मेदारी, समन्वय और निश्चित समय-सीमा तय हो. मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर, शुक्रवार को फिर होगी.
