पटना से नितिश सिंह की रिपोर्ट
Patna Cyber Fraud: पटना के फुलवारीशरीफ इलाके में साइबर बदमाशों ने फुलवारीशरीफ के सेवानिवृत्त प्राध्यापक मो. गयासुद्दीन को 13 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा और उनसे 82.53 लाख की भारी-भरकम ठगी कर ली. अपराधियों ने बीते 27 मार्च से आठ अप्रैल तक उन्हें लगातार डिजिटल अरेस्ट रखा और स्काइप व व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी की. इस मानसिक दबाव के बीच बदमाशों ने यूपीआई (UPI) और आरटीजीएस (RTGS) माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे डलवाए. इतनी बड़ी रकम ऐंठने के बाद भी बदमाशों का मन नहीं भरा और वे जून के अंत तक व्हाट्सएप कॉल व मैसेज के जरिए लगातार पीड़ित को परेशान और प्रताड़ित करते रहे.
जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन
ठगी के इस खौफनाक सिलसिले की शुरुआत 27 मार्च को आए एक अनजान फोन कॉल से हुई थी. बदमाशों ने रिटायर्ड प्राध्यापक को फोन किया और बताया कि वह दिल्ली की एक शीर्ष केंद्रीय जांच एजेंसी का बड़ा अधिकारी बोल रहा है. कॉलर ने डराते हुए कहा कि प्राध्यापक के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किसी बड़ी राष्ट्रविरोधी गतिविधि में किया गया है. उस नंबर से एक बैंक खाता लिंक्ड है, जिसमें संदिग्ध व अवैध रूप से करोड़ों के ट्रांजेक्शन किए गए हैं. इसके कारण उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग और देश विरोधी गतिविधियों जैसे बेहद गंभीर मामले में आ चुका है और गिरफ्तारी वारंट भी जारी हो चुका है.
फर्जी वारंट भेजकर पैदा किया डर
बदमाशों ने प्रोफेसर को धमकी दी कि यदि उन्होंने इस गुप्त जांच में पूरा सहयोग नहीं किया, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा. इसके साथ ही उन्हें घर से बाहर निकलने पर हत्या हो जाने का झूठा डर भी दिखाया गया. खुद को कभी सीबीआई (CBI) तो कभी ईडी (ED) का अधिकारी बताकर शातिर बदमाश वीडियो कॉल के जरिए जुड़े रहते थे. प्राध्यापक को पूरी तरह डराने के लिए उनके व्हाट्सएप पर फर्जी सरकारी कागजात, सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जाली गिरफ्तारी वारंट भी भेज दिए गए. इसके कारण रिटायर्ड प्राध्यापक बुरी तरह डर गए और हमेशा कैमरे के सामने बैठे रहे.
बैंक जाकर भी नहीं दी जानकारी
अपराधियों ने प्राध्यापक और उनके परिजनों को मानसिक रूप से पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया था. डर का आलम यह था कि घर के अन्य सदस्यों की मौजूदगी के बावजूद किसी ने इस विषय पर बाहरी दुनिया से कोई चर्चा नहीं की. इस दौरान रिटायर्ड प्राध्यापक खुद आरटीजीएस ट्रांसफर करने के लिए दो बार बैंक भी गए, लेकिन खौफ के कारण वहां भी किसी बैंक कर्मी को कोई जानकारी नहीं दी. बदमाशों ने धीरे-धीरे कर उनकी जिंदगी भर की पूरी जमा पूंजी लूट ली. जब बदमाशों को यकीन हो गया कि अब पीड़ित के पास पैसे नहीं बचे हैं, तब उन्होंने कैमरा बंद करने की बात कही.
परिचित के आने पर खुला राज
कैमरा बंद होने के बाद भी जून महीने के अंत तक व्हाट्सएप के माध्यम से तरह-तरह की धमकियां देकर प्रोफेसर को लगातार डराया जाता रहा ताकि वे पुलिस के पास न जाएं. इसी बीच उनका एक करीबी परिचित उनके घर आया, तो प्राध्यापक ने रोते हुए उन्हें अपनी आपबीती सुनाई. इसके बाद परिजन और परिचित उन्हें लेकर तुरंत साइबर थाना पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई. साइबर थाना पुलिस ने प्राध्यापक के बयान पर मामला दर्ज कर लिया है और जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए हैं, उन्हें फ्रीज कराने तथा अपराधियों के तकनीकी सुराग ढूंढने की कार्रवाई में जुट गई है.
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