Bihar News: (अमृता सिंह की रिपोर्ट)
बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर सोमवार को बोर्ड का रिपोर्ट कार्ड जारी किया. उन्होंने कहा कि पिछले एक साल के दौरान संस्कृत शिक्षा के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं.
मध्यमा परीक्षा में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2026 की मध्यमा परीक्षा में परीक्षार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. पिछले वर्ष जहां 13,241 छात्र परीक्षा में शामिल हुए थे, वहीं इस वर्ष करीब 24 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी. पिछले आठ वर्षों में यह सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है.
पहली बार बनी बोर्ड की वेबसाइट
उन्होंने कहा कि पहली बार बोर्ड की अपनी सरकारी वेबसाइट तैयार की गई, जिसके माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और परीक्षा परिणाम जारी किए गए. इसके अलावा मध्यमा परीक्षा का परिणाम रिकॉर्ड 27 दिनों में प्रकाशित किया गया. साथ ही पहली बार पूरक परीक्षा का भी सफलतापूर्वक आयोजन कराया गया.
नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव
बोर्ड ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ्यक्रम में बदलाव किए हैं. आने वाले समय में राज्य के 40 संस्कृत विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा. इन विद्यालयों में कंप्यूटर लैब, डिजिटल पुस्तकालय और आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
एआई आधारित शिक्षा पर जोर
मृत्युंजय कुमार झा ने बताया कि संस्कृत शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए एआई आधारित शिक्षा प्रणाली और भाषा प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है.
रोजगारोन्मुखी बनेगी संस्कृत शिक्षा
उन्होंने कहा कि संस्कृत शिक्षा को रोजगारोन्मुखी और तकनीक आधारित बनाकर बिहार को इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
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