Bihar Cyber Crime(नितिश सिंह): राजधानी पटना की साइबर थाना पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय साइबर अपराधी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने रामकृष्णानगर थाना क्षेत्र के जकरियापुर इलाके में ताबड़तोड़ छापेमारी कर गिरोह के मुख्य सरगना सहित 2 शातिर साइबर ठगों को रंगे हाथ दबोचा है. ये शातिर अपराधी पटना में छात्र बनकर किराये का फ्लैट लेकर रह रहे थे और वहीं से देशव्यापी साइबर क्राइम के काले कारोबार को ऑपरेट कर रहे थे.
पुलिस की शुरुआती जांच में ही यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गैंग ने बिहार समेत महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों के सैकड़ों लोगों से अब तक 1.50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की वारदात को अंजाम दिया है.
लैमटी (लैपटॉप, एटीएम और चेकबुक) के साथ दबोचे गए ठग
साइबर थाना प्रभारी सह डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने दोनों की गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि जकरियापुर के इस साइबर हब से भारी मात्रा में डिजिटल दस्तावेज और गैजेट्स बरामद किए गए हैं.
बरामद सामानों की सूची:
मोबाइल फोन: 11 एक्टिव स्मार्टफोन (ठगी के लिए इस्तेमाल)
एटीएम कार्ड: 12 विभिन्न बैंकों के एटीएम (ATM) कार्ड
चेकबुक व पासबुक: 13 चेकबुक और 1 पासबुक
तकनीकी उपकरण: 1 अत्याधुनिक लैपटॉप (डाटा हैकिंग और ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग के लिए)
म्यूल अकाउंट (Mule Account) के जरिए पैसे मंगाने का था खेल
पकड़े गए अपराधियों में नालंदा का रहने वाला संजय कुमार और नवादा निवासी अभिषेक कुमार शामिल हैं. पुलिस जांच के अनुसार, इन दोनों का ठगी करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर था. ये दोनों ग्रामीण और सीधे-साधे लोगों को सरकारी लोन या योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनकी आईडी और पर्सनल दस्तावेज ले लेते थे. उन दस्तावेजों के आधार पर बैंक में खाता (म्यूल अकाउंट) खुलवा दिया जाता था, जिसका पासबुक और एटीएम कार्ड ये ठग अपने पास ही रख लेते थे. गैंग ने इसी तरह झांसा देकर आदित्य कुमार शर्मा नाम के व्यक्ति का म्यूल खाता खुलवाया और उसमें साइबर फ्रॉड के 66 लाख रुपये का बड़ा ट्रांजेक्शन कर डाला. जब आदित्य को इस अवैध ट्रांजेक्शन की भनक लगी, तो उसने तुरंत साइबर थाने में केस दर्ज कराया. पुलिस ने इसी केस की टेक्निकल कस्टडी लिंक को ट्रैक कर दोनों को दबोच लिया.
सरगना की गर्लफ्रेंड का रोल: मीठी बातों में फंसाकर लेती थी दस्तावेज
गिरफ्तार अपराधियों में संजय कुमार (महज 10वीं पास) इस पूरे गैंग का मास्टरमाइंड और सरगना है. जांच में पता चला है कि संजय इस धंधे में अपनी गर्लफ्रेंड को भी शामिल किए हुए था. संजय की प्रेमिका लोगों को फोन करती थी और खुद को सरकारी अधिकारी बताकर किसान सम्मान निधि योजना, ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मोटी राशि दिलाने का लालच देती थी. जैसे ही लोग उसकी मीठी बातों के झांसे में आते, वह उनसे खाता खोलने की प्रक्रिया के नाम पर सारे कागजात वॉट्सऐप पर मंगा लेती थी. फिलहाल पुलिस संजय की इस फरार प्रेमिका की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है.
तैयारी करने आए ग्रेजुएट छात्र को पैसे का लालच देकर बनाया अपराधी
इस गैंग का दूसरा सदस्य अभिषेक कुमार ग्रेजुएट है. वह पटना के जकरियापुर इलाके में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था. इसी दौरान उसकी मुलाकात संजय से हुई. संजय ने उसे बिना मेहनत के रातों-रात अमीर बनने और मोटी कमाई का लालच दिया, जिसके बाद अभिषेक पढ़ाई छोड़कर साइबर अपराध के दलदल में धंस गया. दोनों ने मकान मालिक को छात्र होने का झांसा देकर कमरा किराये पर लिया था और पिछले करीब 1 साल से इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे थे.
साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, संजय और अभिषेक के ऊपर भी देशव्यापी साइबर सिंडिकेट के कई बड़े आका और मास्टरमाइंड बैठे हैं. गिरफ्तार आरोपियों से मिली लीड के आधार पर पुलिस की विशेष टीमें अन्य अपराधियों को दबोचने के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं.
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