आगंतुक रजिस्टर से थानों में बिचौलियों की नो इंट्री

बिहार पुलिस थानों की कार्यशैली में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार की पहल पर राज्य के सभी थानों में आगंतुक हस्ताक्षर पंजी अनिवार्य कर दिया गया है.

By RAKESH RANJAN | April 21, 2025 11:43 PM

अनुज शर्मा, पटना बिहार पुलिस थानों की कार्यशैली में एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है. पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार की पहल पर राज्य के सभी थानों में आगंतुक हस्ताक्षर पंजी अनिवार्य कर दिया गया है. इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य थानों में अवांछित व्यक्तियों, विशेषकर कथित दलालों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण और पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. डीजीपी विनय कुमार का कहना है कि लोकतंत्र में पुलिस व्यवस्था का आधार जनता का भरोसा होता है. थानों में आने-जाने वालों का पूरा ब्योरा दर्ज करने से यह भरोसा मजबूत होगा. ‘जब कोई व्यक्ति थाने आता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि वह क्यों आया, एफआइआर दर्ज कराने, अनुसंधान की प्रगति जानने या अन्य किसी कार्य से. आगंतुक रजिस्टर यही जानकारी दर्ज करने का माध्यम बनेगा़ ’ डीजीपी ने कहा कि 600 पुराने थानों में आगंतुक डेस्क स्थापित हो चुका है. नये थाना भवनों में सभी सुविधायुक्त आगुंतक कक्ष हैं. पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगंतुक रजिस्टर की निगरानी डीएसपी से लेकर आइजी स्तर तक की जायेगी, जिससे थानों की जवाबदेही और जनविश्वास दोनों मजबूत होंगे. डीजीपी स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही का एक सशक्त औजार है. इसे सिर्फ थानेदार के स्तर पर ही नहीं, बल्कि अनुमंडल (डीएसपी), जिला (एसपी), रेंज (आइजी) और स्तर तक को इसकी निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है. डीजीपी ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि निरीक्षण के दौरान वे अन्य व्यवस्थाओं के साथ आगंतुक पंजी का भी गहन अवलोकन करें. महुआ थाने की पहल को सराहा वैशाली जिले के महुआ थाना ने इस पहल को सबसे पहले अमल में लाकर उदाहरण प्रस्तुत किया है. यहां थानाध्यक्ष राजेश शरण ने आगंतुक रजिस्टर की जिम्मेदारी तीन पालियों में निर्धारित की है, जिससे किसी भी समय आने वाला व्यक्ति बिना रजिस्ट्रेशन प्रवेश न कर सके. एसआइ सिंकू कुमारी को इसके लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है. रजिस्टर को प्रमाणित किया गया है ताकि उसमें किसी तरह की हेराफेरी न हो सके डीजीपी ने इस पहल को सराहा है. क्या कहते हैं डीजीपी हर आगंतुक की उपस्थिति और उद्देश्य दर्ज करना पुलिसिंग को जनोन्मुखी बनाने की दिशा में अहम कदम है. इससे थानों में कार्यप्रणाली बेहतर हुई है और जनता का भरोसा बढ़ा है. इस व्यवस्था की नियमित समीक्षा हो रही है, ताकि लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई हो. हमारा फोकस पुलिस और जनता के बीच संवाद को मजबूत करना है. विनय कुमार, डीजीपी, बिहार

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