CM से संसद तक: 'सुशासन बाबू' की खामोश विदाई, कल के बाद बिहार की राजनीति में खलेगा खालीपन...

Nitish Kumar : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा के सदस्‍य की शपथ लेने वाले हैं. इसके बाद बिहार के मुख्‍यमंत्री के पद से भी उनका इस्‍तीफा तय है. 20 साल के बाद प्रदेश की राजनीति से उनकी विदाई ‘एक युग का अंत’ कहा जा रहा है. जानिए क्‍यों खलेगा खालीपन.

Nitish Kumar : नीतीश सिर्फ पद नहीं छोड़ रहे… बिहार की राजनीति अपने एक पूरे दौर से विदा हो रही है. अब कल के बाद से बिहार की राजनीति में एक खालीपन खलने वाला है. नीतीश कुमार ने आज दिल्‍ली में पत्रकारों से बातचीत की. उन्‍होंने कहा- ‘अब वहां का छोड़, यहीं काम करेंगे’. नीतीश कुमार के मुंह से निकले ये शब्‍द भावुक करने वाले थे.

अगले 18 घंटों में केंद्र के हो जाएंगे नीतीश

नीतीश दो दशकों तक बिहार की राजनीति का केंद्र रहे. उन्‍होंने बिहार की राजनीति को आपने इशारों पर चलाया. वह नीतीश कुमार अब अगले 18 घंटों में केंद्र की राजनीति का औपचारिक हिस्‍सा हो जाएंगे. फिलहाल उनकी विदाई की कोई औपचारिक या आधिकारिक तैयारी नहीं हो रही, न कोई बड़ा समारोह… लेकिन माहौल में एक अलग ही भावुकता जरूर घुल रही है.

नई भूमिका में जाने को तैयार

सत्ता के शीर्ष पर सबसे लंबे समय तक रहने वाले चेहरों में Nitish Kumar एकलौते हैं. वो अब नई भूमिका में जाने की तैयारी में हैं. कल जब वो राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे और संभवत: 48 से 60 घंटों में बिहार के सीएम की कुर्सी से भी खुद को अलग कर लेंगे. यह सिर्फ एक औपचारिक कदम नहीं, यह उस दौर का अंत भी होगा, जिसने बिहार की राजनीति को लगभग दो दशकों तक दिशा दी.

बिहार के ‘भगीरथ’ नीतीश

2005 से शुरू हुआ उनका यह राजनीति सफर 2026 में खत्‍म हो रहा है. इस सफर ने उन्‍हें कई नाम दिए. किसी ने उन्‍हें प्‍यार से नीतीश बाबू कहा, तो किसी ने नीतीश चाचा. इन 20 सालों के सफर में उन्‍होंने बिहार को एक घर की तरह सजाने की कोशिश की. उन्‍होंने कहीं, गंगा पर पुल बनवाए, तो कही, जंगल बना डाला. कभी ‘भगीरथ’ बन कर बिहार के उन हिस्‍सों में ‘गंगा वाटर लिफ्ट परियोजना’ चला दी, जो इलाका सुखाड़ झेलता है.

CM से संसद तक, 20 साल का सफर

उन्‍होंने न केवल राजधानी पटना को सजाया, पुल पुलिया, सड़क और मेट्रो बनवाया बल्कि पूरे बिहार की छवि बदल कर रख दी. ये उनके 20 सालों की मेहनत का असर था कि अब बिहार की पहचान केवल मजदूर और पलायन के लिए नहीं. वह नीतीश कुमार के जुझारू प्रदेश के रूप में पहचाना जाता है. जो राज्‍य के लोगों को भी सरकारी नौकरी देता है.

राजनीति के हर रंग देखे

बिहार की राजनीति में हमेशा उतार चढ़ाव आए. सरकारें आईं, सरकारें गईं. कभी RJD की सरकार बनी, कभी बीजपी की, मगर एक चेहरा जो हमेशा स्थिर रहा वो नीतीश कुमार का था. अपने 20 सालों शासन काल में उन्‍होंने 10 बार मुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली.

इस बार कहानी अलग क्यों?

उन्‍होंने कई विधानसभा चुनाव देखे, कई उपचुनाव देखे. राजनीत‍ि के उठा-पटक भी देखे, वार-पलटवार भी देखे. कभी उन्‍हें ‘पलटू’ कहा गया, कभी छलिया, कभी ‘पेट में दांत’ वाला. मगर, इन सबके बावजूद बिहार बढ़ता रहा. उनकी मर्जी के बगैर कोई उनसे बिहार की सत्‍ता छीन नहीं सका. मगर, इस बार कहानी थोड़ी अलग है. इस बार सत्ता उनसे छीनी नहीं गई, उन्होंने खुद मंच छोड़ने का फैसला किया है. यही वजह है कि यह बदलाव राजनीतिक कम, भावनात्मक ज्यादा महसूस हो रहा है. 

वो लंबी बैठकें, अब याद आएंगी

बिहार विधानसभा के गलियारे में गूंजती उनकी आवाज, सदन के दौरान ही सदन के भीतर ही पत्रकार दीर्घा में पत्रकारों से इशारों में संवाद, किसी भी सार्वजनिक मंच से बिना नाम लिए पत्रकारों से अपनी बात कह देने की सहजता को हम भी बहुत याद करेंगे. अधिकारियों के साथ उनकी लंबी बैठकों का दौर, पत्रकारों और फरियादियों के लिए सीएम नीतीश की सुलभता अब अतीत का हिस्सा बनने जा रही है.

अब आगे क्या? सबसे बड़ा सवाल

नीतीश कुमार के इस्‍तीफ के साथ ही बिहार की जनता के मन में भी सवालों का एक नया दौर शुरू होने वाला है. बिहार की कमान अब किसके हाथ में जाएगी? क्या यह सिर्फ पद परिवर्तन है या सत्ता हस्तांतरण? नीतीश के बाद बिहार के विकास की स्क्रिप्ट क्‍या होगी? अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है. इधर, Nishant Kumar का नाम भी धीरे-धीरे चर्चा में जगह बना रहा है. लेकिन इन सबके बीच ये एक नेता का पद बदलना नहीं, बिहार की राजनीति के एक पूरे युग का बदलना है. कल जब नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेंगे, तो वह सिर्फ एक सांसद नहीं होंगे. वह उस सफर का भी प्रतिनिधित्व करेंगे, जिसने बिहार को कई बार बदला, संभाला और नया रास्‍ता दिखाया.

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लेखक के बारे में

By Keshav Suman Singh

बिहार-झारखंड और दिल्ली के जाने-पहचाने पत्रकारों में से एक हैं। तीनों विधाओं (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब) में शानदार काम का करीब डेढ़ दशक से ज्‍यादा का अनुभव है। वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में बतौर डिजिटल हेड बिहार की भूमिका निभा रहे हैं। इससे पहले केशव नवभारतटाइम्‍स.कॉम बतौर असिसटेंट न्‍यूज एडिटर (बिहार/झारखंड), रिपब्लिक टीवी में बिहार-झारखंड बतौर हिंदी ब्यूरो पटना रहे। केशव पॉलिटिकल के अलावा बाढ़, दंगे, लाठीचार्ज और कठिन परिस्थितियों में शानदार टीवी प्रेजेंस के लिए जाने जाते हैं। जनसत्ता और दैनिक जागरण दिल्ली में कई पेज के इंचार्ज की भूमिका निभाई। झारखंड में आदिवासी और पर्यावरण रिपोर्टिंग से पहचान बनाई। केशव ने करियर की शुरुआत NDTV पटना से की थी।

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