Nitish Kumar emotional video : बिहार की सियासत में सख्त फैसलों और शांत स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले Nitish Kumar का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया. सीएम नीतीश का एक भावुक करने वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. आरा में ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान मंच पर बैठे मुख्यमंत्री के सामने एक पोस्टर लहराया. इसके बाद तो माहौल अचानक भावनाओं से भर उठा. जिसपर लिखा था ‘आदरणीय नीतीश कुमार जी कृपया मुख्यमंत्री पद न छोड़ें. आपकी बिहार को आवश्यकता है.’ शायद ये सिर्फ पोस्टर नहीं था, ये उन हजारों लोगों की भावना थी, जो सीएम नीतीश को बिहार से नहीं देना चाहता है।
एक इशारा… और ठहर गया समय
सभा के दौरान भी इस पल को देखकर कुछ पल के लिए गंभीर हो गए. यह दृष्य सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है. लोग भावुक हो रहे हैं. ऐसा नहीं है कि ये भावना एक-तरफा थी. इस पोस्टर को देख कर सीएम नीतीश भी उसकी तरह अपनी भावनाओं पर कंट्रोल करते नजर आए. जब सभा के दौरान उनके चाहने वालों ने ये पोस्टर दिखाया तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर बैठे उसे देख रहे थे. वो पहले तो इस पोस्टर को देखकर गंभीर दिखे, फिर एक मुस्कान के साथ अपने सहयोगियों की ओर इशारा किया. वो इशारा कुछ इस अंदाज में था… देखिए… उसे ले आइये!
एक मौन में छिपी अपील… और थमा दिया पोस्टर
उन्होंने अपने हाथ से इशारा किया इस पोस्टर लिखने वालों को बुलाने की इच्छा जाहिर की. सीएम नीतीश के इशारे पर सुरक्षाकर्मी को भेजकर पोस्टर मंगवा लिया गया. जिन लोगों ने ये पोस्टर बनाया था, उन्होंने भी इस पोस्टर एक फिर सीएम नीतीश को खोल कर दिखाया और भारी मन से एक बार बिहार से न जाने का मौन अनुरोध करते नजर आए. इसके बाद इस पोस्टर को सुरक्षाकर्मी को थमा दिया.
अपनी भावनाओं पर भी काबू करते दिखे सीएम नीतीश
जब उनके चाहने वालों ने ये पोस्टर सुरक्षाकर्मियों को थमाया, उस वक्त सीएम नीतीश अपनी भावनाओं पर नियंत्रण करते नजर आए. उन्होंने अपनी गर्दन झुला ली. अपने अंदाज में जैसे वो इन लोगों का आभार जताते नजर आए. उनके चेहरे के बदलते भाव यह साफ बता रहे थे कि ये पल उनके लिए भी आसान नहीं था. लेकिन एक अनुभवी नेता की तरह उन्होंने खुद को संयमित रखा, क्योंकि जिम्मेदारियां भावनाओं से बड़ी होती हैं.
20 साल की राजनीति… और अटूट रिश्ता
बिहार की सत्ता में करीब दो दशकों तक अहम भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार के लिए यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे का भी प्रतीक है. आरा की इस सभा में जो दिखा, वह राजनीति से परे था और भावनाओं के करीब था. जो एक नेता और उसकी जनता के बीच गहरे विश्वास का प्रमाण था. ये भावनात्मक रिश्ते की झलक थी.
