Maamla Legal Hai 2: यदि दर्शक अपना प्यार व समर्थन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाएं, तो नेटफ्लिक्स जैसे बड़े मंचों पर हमें अन्य भाषाओं की तरह भोजपुरी भाषा का विकल्प भी मिलने लगेगा. यह न केवल कंटेंट के विस्तार के लिए जरूरी है, बल्कि क्षेत्रीय कलाकारों व दर्शकों के बीच एक सीधा सेतु बनाने का काम करेगा. यह बातें सोमवार को नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’ के दूसरे सीजन के प्रोमोशन के सिलसिले में पटना पहुंचे पूर्व सांसद सह अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने कही. उन्होंने बताया कि अब सिनेमाघर आपके हाथ में है.
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने मनोरंजन को सुलभ बना दिया है. जैसे आइपीएल (IPL) में अब भोजपुरी कमेंट्री का विकल्प मिलता है, वैसे ही नेटफ्लिक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर भी भोजपुरी भाषा शामिल हो सकती है. इसके लिए दर्शकों की रुचि और व्यूअरशिप सबसे बड़ी शक्ति है. उनका मानना है कि जब क्षेत्रीय दर्शक डिजिटल क्रांति का हिस्सा बनेंगे, तो भोजपुरी भाषा को वह वैश्विक सम्मान मिलेगा जिसकी वह हकदार है.
भ्रामक विज्ञापनों पर चोट व अवेयरनेस पर आधारित है सीजन 2
सीरीज में अपने किरदार के बारे में चर्चा करते हुए निरहुआ (Nirhua) ने बताया कि वह एक ऐसे सीधे-सादे व्यक्ति की भूमिका में हैं, जो विज्ञापनों की चकाचौंध में आकर किसी प्रोडक्ट के इस्तेमाल से खुद को बदल लेना चाहता है. इस किरदार के जरिए उन्होंने समाज में फैले भ्रामक विज्ञापनों और फेयरनेस के प्रति जुनून पर तंज कसा है. उन्होंने अपने स्कूल के दिनों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वे खुद भी गोरा होने के लालच में पांच रुपये का पाउच लगाया करते थे. यह किरदार आम आदमी से सीधा जुड़ाव महसूस कराता है और दर्शकों को यह संदेश देता है कि पर्दे की हर चमक सच नहीं होती.
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हर एपिसोड सामने लाता है एक अलग कहानी व नायक
निरहुआ ने कहा कि इस शो की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी स्क्रिप्ट है, जहां कोई एक व्यक्ति नहीं बल्कि स्क्रिप्ट ही हीरो है. हर एपिसोड एक अलग कहानी और नायक को सामने लाताहै. निरहुआ ने कहा कि फिल्मों की समय सीमा होती है, लेकिन वेब सीरीज में किरदारों और मुद्दों को विस्तार से कहने का मौका मिलता है, जिससे समाज की दबी हुई बातें भी मनोरंजन के माध्यम से सामने आ पाती हैं. वहीं, उन्होंने निर्माताओं और कलाकारों को भी सुझाव दिया कि वे समाज में सकारात्मक प्रेरणा देने वाले किरदार बनाएं.
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