प्रतिनिधि, नौबतपुर
नौबतपुर नगर पंचायत के मुख्य पार्षद की कुर्सी राज्य निर्वाचन आयोग ने आयोग घोषित कर दिया है. उन्हें मुख्य पार्षद से पद मुक्त कर सरकारी सभी कामों से अलग कर दिया है. राज्य निर्वाचन आयोग का यह फैसला वर्षों की लड़ाई के बाद सत्य की जीत बताते हुए पूर्व मुख्य पार्षद कौशल कौशिक ने कहा कि गलत एफिडेविट के बाद सरयुग मोची दोबारा इस पद पर चुनाव जीत कर आये थे. नौबतपुर नगर पंचायत के पूर्व मुख्य पार्षद कौशल कौशिक ने बताया कि नगर पंचायत नौबतपुर के मुख्य पार्षद का पद सुरक्षित है. इस कारण वह पिछले वर्ष चुनाव जीतकर आए और मुख्य पार्षद बन गये. पूर्व मुख्य पार्षद ने बताया कि जब उन्हें जानकारी मिली कि पूर्व में उनके दो से अधिक बच्चा रहने के बावजूद वर्ष 2008 के अप्रैल के बाद भी उन्हें एक संतान की प्राप्ति हुई. उन्होंने बताया कि नगर पालिका अधिनियम के अनुसार 4 अप्रैल 2008 के बाद जिस व्यक्ति के दो से अधिक बच्चा जन्म लेता है तब उनकी पार्षद की पद समाप्त हो जाएगी. इसके अनुसार मुख्य पार्षद सरयूग मोची को 2008 के बाद तीसरे संतान की प्राप्ति होने की सूचना मिलते ही पूर्व मुख्य पार्षद ने इसकी शिकायत राज्य निर्वाचन आयोग में की. उन्होंने बताया कि 2020 में इसकी शिकायत की गयी. तब से लगातार इस मामले की जांच हो रही थी. फिर यह मामला हाइकोर्ट से सुप्रीमकोर्ट गया. कौशल कौशिक ने बताया कि 17 अक्टूबर को बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने इस पर अपनी अंतिम मोहर लगाते हुए नगर पंचायत के वर्तमान मुख्य पार्षद सरयुग मोची को उनके पद से पद मुक्त कर दिया है. इस बात को लेकर नौबतपुर नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी भवेश प्रसाद से बात करने पर उन्होंने बताया कि उन्हें राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अंतिम निर्णय लिया गया पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें यह स्पष्ट होता है कि नौबतपुर नगर पंचायत के मुख्य पार्षद सरयुग मोची को उनके पद से पद मुक्त कर दिया गया है.
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