National Camera Day: पहले कैमरे में रील होता था. फोटो खींचने के बाद हफ्तों इंतजार करना पड़ता था कि तस्वीर कैसी आई. आज मोबाइल निकाला, क्लिक किया और तुरंत सोशल मीडिया पर रील पोस्ट कर दी. यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि हमारी यादों को सहेजने के तरीके का है. आज 29 जून को राष्ट्रीय कैमरा दिवस है. एक दौर था जब कैमरा में 36 फोटो की रील (निगेटिव) इस डर के साथ लोड की जाती थी कि कहीं कोई शॉट बेकार न हो जाए. आज वह बंदिशें इतिहास बन चुकी हैं. कैमरा अब किसी अलमारी या बैग में बंद रहने वाली चीज नहीं, बल्की हमारी जेब में 24 घंटे मौजूद रहने वाला साथी बन गया है. रील के सीमित दायरे से निकलकर इंस्टाग्रामरील्स व एआइ के आसमान में पहुंचे सफर पर पेश है आज की कवर स्टोरी.
पहले यादों के रूप में ली जाती थी तस्वीरें, अब स्टेटस या पोस्ट के लिए
आज स्मार्टफोन कैमरों के आने से यह विधा हर आम और खास के हाथ की कठपुतली बन चुकी है. अब सुबह की पहली चाय, सड़क का ट्रैफिक, बारिश की बूंदें या दोस्तों के साथ अचानक हुई मुलाकात. हर छोटी-बड़ी चीज कैमरे का सब्जेक्ट है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इस बदलते स्वरूप को एक नई रफ्तार दी है. पहले तस्वीरें सिर्फ पारिवारिक एलबम में कैद होने के लिए खिंचती थीं, जिन्हें सालों बाद मेहमानों को दिखाया जाता था. आज तस्वीरें पब्लिक कंजम्पशन के लिए हैं. इन्हें तुरंत खींचा जाता है, फिल्टर लगाया जाता है और दुनिया के सामने स्टेटस या एक्सप्रेशन के रूप में पोस्ट कर दिया जाता है.
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हर दिन साझा हो रही हैं 14 अरब तस्वीरें
स्टैटिस्टा द्वारा सीआईपीए के आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण के अनुसार, साल 2010 से 2023 के बीच वैश्विक कैमरा शिपमेंट में लगभग 94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. इसका मुख्य कारण स्मार्टफोन कैमरों की गुणवत्ता में सुधार है. हालांकि, कैमरे भले ही कम बिक रहे हों, लेकिन तस्वीरें खींचने और देखने का क्रेज इतना बढ़ चुका है कि एक रिपोर्ट के मुताबिक आज दुनिया भर में प्रतिदिन सोशल मीडिया व मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर लगभग 14 अरब तस्वीरें साझा की जा रही हैं.
हर जगह कैमरा ले जाने के बजाय मोबाइल से करते हैं शूट
पत्रकारिता एवं जनसंचार के छात्र प्रभास बताते हैं कि उन्हें फोटोग्राफी का बेहद शौक है और वे पटना के विभिन्न लोकेशंस पर जाकर अक्सर तस्वीरें लेते हैं. हालांकि, तकनीक के बदलते दौर में उन्होंने अब पारंपरिक कैमरों से ज्यादा मोबाइल का प्रयोग शुरू कर दिया है. प्रभास कहते हैं कि उनके पास वर्तमान में एक आइफोन व सैमसंग की एस सीरीज का फोन है. इन स्मार्टफोन्स का कैमरा इंजन इतना एडवांस और शार्प है कि इनसे प्रोफेशनल स्तर की फोटोग्राफी आसानी से हो जाती है. वहीं, लोकेशन को लेकर बताया कि बिहार म्यूजियम के पीछे शानदार व्यू है.
चुनौतियों के बीच पटना में ही तलाशा वाइल्डलाइफ
शहर के वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अंशु शर्मा बताते हैं कि उन्होंने क्रिएटिविटी के कारण फोटोग्राफी को चुना. पटना में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी करना एक बड़ा चैलेंज था, लेकिन वे साबित करना चाहते थे कि इसके लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं है. रचनात्मक सोच हो तो यहां भी बेहतरीन काम हो सकता है. लॉकडाउन के दौरान उन्होंने पटना जू में पक्षियों और जीवों के हैबिटैट को समझा और समय देकर तस्वीरें लीं. वे मशहूर फोटोग्राफर शाज जंग से प्रेरित हैं और उनके काम से काफी कुछ सीखा है. पटना में ही खींची गई अपनी शानदार तस्वीरों के लिए अंशु को बिहार सरकार से दो बार पुरस्कार भी मिल चुका है, जिसमें वे पूरे बिहार में दूसरे स्थान पर रहे थे.
मरीन ड्राइव के पास पिंक पैराडाइज पटना का बेस्ट स्पॉट
शहर के नामी फोटोग्राफर सौरभ अनुराज बताते हैं कि साल 2012 में वे इंजीनियरिंग छोड़ अपने पैशन के लिए पटना लौटे और यहां अपना पहला डीएसएलआर खरीदा. वे बताते हैं कि पहले के कैमरे काफी स्लो हुआ करते थे, लेकिन आज तकनीक बेहद एडवांस और कॉम्पैक्ट हो चुकी है. अब स्मार्टफोन में ही हाइ-रिजॉल्यूशन और बेहतरीन क्वालिटी मिल जाती है, यहां तक कि स्मार्ट चश्मों में भी शानदार कैमरे आने लगे हैं. सौरभ ने पटना में ही रहकर अल्लू अर्जुन सहित देश की कई बड़ी हस्तियों का प्रोफेशनल शूट किया है. वर्तमान में पटना का मरीन ड्राइव के पास पिंक पैराडाइज युवाओं व फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए शहर के सबसे बेहतरीन और पसंदीदा स्पॉट्स में से एक है.
हॉबी को प्रोफेशन बना तीन जेनेरेशन के कैमरे से तस्वीरें खींचीं
अनिसाबाद के रहने वाले सौरभ राज बताते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में कैमरे की तीन पीढ़ियों को इस्तेमाल किया है. कंप्यूटर साइंस के छात्र रहे सौरभ को बचपन से ही फोटोग्राफी का शौक था, जिसे आगे चलकर उन्होंने साल 2004 से अपना मुख्य पेशा बना लिया. वे मुख्य रूप से नेचर, लैंडस्केप व ट्रैवल फोटोग्राफी करना पसंद करते हैं. उनके अनुसार, कैमरे ने डार्क रूम के दौर से लेकर आज के आधुनिक मिररलेस कैमरे तक का एक लंबा सफर तय किया है. तकनीक में हुए सुधार के कारण अब कैमरे को ऑपरेट करना और इस्तेमाल करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो चुका है. वहीं, शहर में शैडो, यादें, डैफोडिल्स, शालीमार, त्रिवेदी व कैंब्रिज जैसी पुरानी दुकानें और स्टूडियो यहां आज भी एक ऐतिहासिक धरोहर की तरह हैं.
स्टूडियो और प्रिंटिंग के सामने अस्तित्व का संकट
- पहले लोग एलबम तैयार करवाते थे. आज हार्ड कॉपी या प्रिंटेड फोटो का चलन लगभग 70 से 80 फीसदी तक गिर चुका है. अब लोग अपनी यादों को सुरक्षित रखने के लिए मोबाइल की गैलरी, हार्ड ड्राइव या गूगल क्लाउड का इस्तेमाल करते हैं.
- आम पासपोर्ट साइज फोटो या छोटे आयोजनों के लिए अब कोई स्टूडियो का रुख नहीं करता. गली-मोहल्लों के छोटे स्टूडियो अब डिजिटल सेवा केंद्रों या ऑनलाइन फॉर्म भरने वाली दुकानों में तब्दील हो चुके हैं.
- कैमरा बेचने वाले डीलर्स और शॉप्स का कस्टमर बेस बदल गया है. अब शौकिया तौर पर कोई डीएसएलआर या महंगा कैमरा नहीं खरीदता, क्योंकि उनके फोन का कैमरा ही सारे शौक पूरे कर देता है. अब कैमरों की बिक्री केवल प्रोफेशनल वेडिंग, वाइल्डलाइफ या स्ट्रीट फोटोग्राफर्स तक सीमित रह गई है.
सिनेमैटिक शॉट्स और ड्रोन वीडियोग्राफी का बढ़ रहा चलन
कैमरे व फोटोग्राफी के बदलते स्वरूप के बीच एक नया बाजार भी तैयार हुआ है. शादी-ब्याह व बड़े कॉरपोरेट इवेंट्स में अब लोग सामान्य तस्वीरों की जगह सिनेमैटिक शॉट्स, ड्रोन वीडियोग्राफी और प्री-वेडिंग शूट की मांग कर रहे हैं, जिससे प्रोफेशनल फोटोग्राफर्स की ब्रांड वैल्यू और कमाई दोनों बढ़ी है. इससे पटना में ही कई फोटोग्राफर ऐसे प्रोजेक्ट लेते हैं. बड़े-बड़े इंवेंट के लोग यहां के फोटोग्राफर को प्राथमिकता दे रहे हैं.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व एडिटिंग ऐप्स की भी हुई एंट्री
आज मोबाइल फोन का एआइ इंजन फोटो खींचते ही बैकग्राउंड की रोशनी, चेहरे के रंग और कंट्रास्ट को खुद-ब-खुद बैलेंस कर देता है. यदि फोटो में कोई अनचाहा व्यक्ति या चीज आ गई है, तो एआइइरेजर से उसे एक सेकंड में गायब किया जा सकता है. खराब और धुंधली पुरानी तस्वीरों को एआईएनहांसर के जरिए बिल्कुल नया और साफ बनाया जा रहा है. इसने आम आदमी को भी प्रोफेशनल एडिटर बना दिया है.
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फोटोग्राफी हॉटस्पॉट बने शहर के ये सात लोकेशंस
फोटोग्राफी और रील्स बनाने के इस बढ़ते क्रेज ने पटना शहर के भूगोल व युवाओं की लाइफस्टाइल को भी प्रभावित किया है. शहर में कई ऐसे लोकेशंस उभर रहे हैं, जो अब फोटो स्पॉट्स बन चुके हैं.
मरीन ड्राइव (गंगा पथ): सुबह के गोल्डन आवर और शाम के ब्लू आवर में यह जगह पटना के युवाओं, व्लॉगर्स व स्ट्रीट फोटोग्राफर्स का गढ़ बन जाती है. गंगा की लहरें और ढलता सूरज बेहतरीन सिनेमैटिक बैकग्राउंड देते हैं.
बिहार संग्रहालय: आधुनिक वास्तुकला, जापानी शैली के बगीचों और शानदार लाइटिंग के कारण यह जगह प्री-वेडिंग व पोर्ट्रेट फोटोग्राफी के लिए सबसे हॉट डेस्टिनेशन बन चुकी है. म्यूजियम के पीछे वाली गेट के पास रंग-बिरंगे फूलों के बीच काफी आकर्षक है.
एनआइटी घाट: गंगा संस्कृति, रंग-बिरंगी नावों व शाम की भव्य आरती को कैमरे में कैद करने के लिए यह पारंपरिक और स्ट्रीट फोटोग्राफी का सबसे बड़ा केंद्र है.
इको पार्क व पटना जू: प्रकृति प्रेमियों, लैंडस्केप फोटोग्राफर्स, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और कपल्स के लिए यह पार्क व जू हरी-भरी वादियों और खूबसूरत झीलों के साथ फोटोग्राफी का बेहतरीन विकल्प देता है.
सभ्यता द्वार: गंगा के किनारे खड़ी यह विशाल और ऐतिहासिक संरचना अपनी शानदार लाइटिंग और आर्किटेक्चर के कारण नाइट फोटोग्राफी के लिए युवाओं को बेहद आकर्षित करती है.
गोलघर: पटना की इस ऐतिहासिक धरोहर का अनोखा गोल आकार और इसके चारों तरफ फैला हरा-भरा परिसर आज भी हेरिटेज और ड्रोन फोटोग्राफी के लिए एक सदाबहार स्पॉट है.
गांधी घाट: नदी के बीच क्रूज का नजारा और गंगा का विहंगम दृश्य व्लॉगिंग और शानदार लैंडस्केप शॉट्स के लिए फोटोग्राफर्स को बेहतरीन फ्रेम देता है.
