पटना विश्वविद्यालय की मेरिट सूची में अधिकांश फर्जी! उठे सवाल

पटना विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गयी अंडरग्रेजुएट नियमित पाठ्यक्रम (यूजी रेगुलर) की प्रथम मेरिट सूची को लेकर विवाद गहराता जा रहा है

-टॉपर लिस्ट में शामिल नामों पर संदेह, अंक घोटाले की आशंका-एडमिशन के लिए 12वीं का बन रहा फर्जी अंकपत्र-टॉप 50 में रहने वाले अधिकांश स्टूडेंट्स ने आवेदन के समय भरा 12वीं का फर्जी अंक!, किसी भी बोर्ड के टॉपर नहीं हैं शामिलसंवाददाता, पटनापटना विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गयी अंडरग्रेजुएट नियमित पाठ्यक्रम (यूजी रेगुलर) की प्रथम मेरिट सूची को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. कई अभ्यर्थियों और शिक्षा विशेषज्ञों ने मेरिट सूची में अंक घोटाले और फर्जीवाड़े की आशंका जतायी है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टॉपर्स की सूची में शामिल अधिकांश नाम ऐसे हैं, जिनका नाम बिहार बोर्ड या सीबीएसइ की किसी भी आधिकारिक टॉपर सूची में शामिल नहीं है. वहीं, राज्य व राष्ट्रीय स्तर के असली टॉपरों ने या तो आवेदन ही नहीं किया है या उनका नाम सूची में कहीं नहीं दिख रहा है. विभिन्न छात्र संगठनों ने कहा कि पटना विश्वविद्यालय की यूजी प्रवेश प्रणाली पर गहराया यह संकट न केवल योग्य विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न भी खड़ा करता है.

99.7 प्रतिशत अंक के दावे पर उठे सवाल

बीएन कॉलेज के बीए ऑनर्स (साइकोलॉजी) में नामांकन के लिए टॉपर छात्रा मान्या ने 12वीं में 99.7 प्रतिशत अंक प्राप्त करने का दावा किया है, जबकि बिहार बोर्ड के इस वर्ष के इंटर साइंस टॉपर (प्रिया जायसवाल- 484 अंक, गवर्नमेंट राज्य संपोषित एसएस प्लस टू स्कूल, वेस्ट चंपारण) को भी 96.8 प्रतिशत अंक ही प्राप्त हुए हैं. आर्ट्स की टॉपर अंकिता कुमारी को 473 अंक (94.6प्रतिशत- राकीयकृत बीएन उच्च विद्यालय, वैशाली) मिला है. इंटर कॉमर्स की टॉपर रोशनी कुमारी ( 475 अंक, 95 प्रतिशत जेएल कॉलेज, हाजीपुर, वैशाली) को 95 प्रतिशत मिला है. वहीं, यह अंतर शिक्षा विशेषज्ञों के गले नहीं उतर रहा. इतना ही नहीं, सूची में 97.8%, 97.4%, 96.6% जैसे अंक भरकर आवेदन किये गये हैं, जो असल बोर्ड टॉपर से भी अधिक हैं. प्रभात खबर की पड़ताल में पीयू की ओर से जारी मेरिट लिस्ट में टॉप 50 में अधिकांश स्टूडेंट्स का आवेदन के समय दिये गये 12वीं के अंक प्रतिशत गलत हैं. पीयू की मेरिट लिस्ट में सीरियल नंबर 224 तक के स्टूडेंट्स 90 प्रतिशत में शामिल हैं. इसमें भी अधिकांश ने 12वीं के मार्क्स आवेदन के समय गलत दिये हैं. अब एडमिशन के दौरान भी गलत मार्कशीट देने की तैयारी एडमिशन माफिया कर रहे हैं. मेरिट लिस्ट में साइंस में शामिल टॉपर वैभव प्रकाश ने 95.4 प्रतिशत भरा है, जो बिहार बोर्ड के टॉपर लिस्ट में शामिल नहीं हैं. वहीं, कॉमर्स में ज्योति कुमारी ठाकुर ने 12वीं में 94.2% भरा है, जबकि बिहार बोर्ड के टॉपर सूची में इनका नाम भी शामिल नहीं है.

बोर्ड टॉपरों का नाम नहीं, मेरिट लिस्ट में अनजान चेहरे

राज्य के किसी भी विद्यालय या बोर्ड टॉपर की सूची में टॉप पर रहे छात्रों के नाम पटना विश्वविद्यालय की मेरिट लिस्ट में दिखायी ही नहीं दे रहे हैं. बिहार बोर्ड, सीबीएसइ या अन्य किसी भी प्रामाणिक परीक्षा बोर्ड की आधिकारिक टॉपर सूची से मिलान करने पर यह साफ हो जाता है कि विश्वविद्यालय की मेरिट लिस्ट में शामिल अधिकांश छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन संदिग्ध है.

आवेदन में फर्जी अंक भरने का अंदेशा

यूनिवर्सिटी के आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि यह प्रवेश प्रक्रिया एक सुनियोजित तरीके से एडमिशन माफिया द्वारा नियंत्रित की जा रही है. कई छात्र फर्जी अंक भरकर न केवल मेरिट सूची में जगह पा रहे हैं, बल्कि योग्य और मेहनती विद्यार्थियों का हक छीन रहे हैं. यदि किसी के अंक राज्य स्तर के टॉपर से भी अधिक हैं, तो यह जानना आवश्यक है कि उन्होंने किस बोर्ड से, किन विषयों में और किस प्रक्रिया से यह अंक प्राप्त किये. विश्वविद्यालय की प्रवेश समिति और तकनीकी टीम पर सवाल उठाते हुए कई अभिभावकों और छात्रों ने मेरिट लिस्ट की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किये हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन आवेदन के दौरान अपलोड किये गये अंकों का कोई सशक्त सत्यापन नहीं किया गया, जिससे अंकों में हेरफेर की आशंका बनी हुई है.

मार्कशीट की पुनः जांच हो

पटना विश्वविद्यालय ने इस वर्ष पूरी प्रवेश प्रक्रिया को ऑनलाइन किया है. छात्र-छात्राएं स्वयं अपने अंकों की प्रविष्टि करते हैं, और इसी आधार पर मेरिट सूची बनती है. लेकिन यदि छात्रों द्वारा दर्ज अंक गलत हैं और उनका कोई वेरिफिकेशन नहीं हुआ, तो यह पूरी व्यवस्था की विफलता है. मांग तेज हो गयी है कि सभी चयनित अभ्यर्थियों की मार्कशीट की पुनः जांच हो.

छात्र संगठनों ने इसे गंभीर लापरवाही बताया

छात्र संगठनों ने इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है. एआइएसएफ, आइसा और छात्र जनअधिकार परिषद जैसे संगठनों ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और जिन छात्रों ने फर्जी अंक डालकर मेरिट सूची में स्थान पाया है, उनका आवेदन तत्काल रद्द किया जाये.

कोट : आवेदन किया जायेगा रद्दमामले की जांच की जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर पुनः सत्यापन की प्रक्रिया चलायी जायेगी. वेरिफिकेशन किया जायेगा. गलत अंक देने वाले सभी अभ्यर्थियों का आवेदन रद्द किया जायेगा.

प्रो अनिल कुमार, डीन, स्टूडेंट्स वेलफेयर, पटना विश्वविद्यालय

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Author: AJAY KUMAR

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