सीबीएसइ- राष्ट्रीय इ-पुस्तकालय से जुड़ेंगे स्कूली बच्चे, स्कूलों को सौंपनी होगी बच्चों की रिपोर्ट

राष्ट्रीय इ-पुस्तकालय से सीबीएसइ स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जोड़ा जायेगा. इ-पुस्तकालय में 23 भाषाओं में 5500 से अधिक गैर शैक्षणिक किताबें इस पर उपलब्ध करायी गयी हैं

संवाददाता, पटना

राष्ट्रीय इ-पुस्तकालय से सीबीएसइ स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जोड़ा जायेगा. इ-पुस्तकालय में 23 भाषाओं में 5500 से अधिक गैर शैक्षणिक किताबें इस पर उपलब्ध करायी गयी हैं. बच्चों की उम्र के अनुसार चार चरणों में इस पुस्तकालय को व्यवस्थित किया गया है. सीबीएसइ ने सभी स्कूलों को इस पर रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया है. स्कूलों में कितने बच्चों को इससे जोड़ा गया, यह भी रिपोर्ट स्कूल के प्रधान को सौंपनी होगी. शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने विद्यार्थियों में आनंददायक पढ़ाई और आजीवन सीखने को बढ़ावा देने के लिए गैर शैक्षणिक पुस्तकों का एक निशुल्क राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय, राष्ट्रीय इ-पुस्तकालय का शुभारंभ किया है. अलग-अलग उम्र के अनुसार इस पर किताबें बांटी गयी हैं. पुस्तकों को पुस्तकालय की सामग्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की शैक्षणिक संरचना के अनुरूप चार श्रेणियों में बांटा गया है. इनमें तीन से आठ वर्ष, आठ से 11 वर्ष, 11 से 14 वर्ष और 14 वर्ष के अनुसार पुस्तकों को रखा गया है. राष्ट्रीय इ-पुस्तकालय में वर्तमान में 200 से अधिक प्रकाशकों की 5500 से अधिक गैर शैक्षणिक पुस्तकें 23 भाषाओं में उपलब्ध हैं. सीबीएसई ने निर्देश दिया है कि यह एप वेब, एंड्रॉयड और आइओएस प्लेटफॉर्म पर उलपब्ध है. इसे शिक्षा मंत्रालय के तत्वाधान में भारत के राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट द्वारा विकसित और कार्यान्वित किया गया है.

विद्यार्थियों और शिक्षकों में पढ़ाई की प्रवृत्ति बढ़ाना है मकसद

सीबीएसइ के सिटी को-ऑर्डिनेटर एसी झा ने कहा कि विद्यार्थियों में डिजिटल पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय इ-पुस्तकालय रजिस्ट्रेशन करने और उसका उपयोग करने के लिए अपने विद्यालय में उपलब्ध सूचना व संचार प्रौद्योगिकी या स्मार्ट क्लासरूम सुविधाओं का उपयोग करने का निर्देश मिला है. शिक्षकों को भी इस एप्लिकेशन को डाउनलोड करना है. ताकि वे इससे परिचित हो सकें और विद्यार्थियों को कभी भी कहीं भी पढ़ने के लिये प्रेरित कर सकें. राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों में पढ़ने के प्रति लगाव को बढ़ाना और भारत की संस्कृतिक और साहित्यिक विरासतों को प्रोत्साहित करना है.

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