उच्च प्राथमिकता निवेश क्षेत्र में मीडिया व मनोरंजन भी शामिल

बिहार में औद्योगिक निवेश के लिए उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र में मीडिया और मनोरंजन घरानों के लिए सृजन को भी शामिल किया गया है.

संवाददाता,पटना बिहार में औद्योगिक निवेश के लिए उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र में मीडिया और मनोरंजन घरानों के लिए सृजन को भी शामिल किया गया है. इस क्षेत्र के निवेशकों को भी बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (बीआइआइपीपी) की सुविधाएं मिल सकेंगी. इसके लिए शर्त यह रखी गयी है कि यूनिट की भूमि को छोड़ कर अचल संपत्तियों, संयंत्र एवं मशीनरी में कम से कम पांच करोड़ रुपये होना चाहिए. साथ ही उस यूनिट में कम से कम 50 कर्मचारियों को प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलना चाहिए. इस पैकेज के तहत रोजगार एवं निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक रुपये की टोकन राशि पर आवश्यकतानुसार भूमि आवंटित की जायेगी. साथ ही ब्याज अनुदान एवं कर संबंधी रियायतें भी दी जायेंगी. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक बिहार में निवेश के लिए उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की संख्या नौ हो गयी है. इसमें खाद्य प्रसंस्करण, वस्त्र निर्माण, मीडिया एवं मनोरंजन घरानों के लिए सृजन ,लॉजिस्टिक , सूचना प्रोद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम सेवाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन ,विनिर्माण और वैश्विक क्षमता केंद्र शामिल हैं. इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन, फार्मास्युटिकल्स और चिकित्सा उपकरण, खिलौना निर्माण, नवीकरण ऊर्जा और हरित ऊर्जा (सीबीजी और ईंधन आधारित इथेनॉल और मैथनॉल सहित ) भी उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र में शामिल हैं. प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में ऑटोमाेबाइल्स , साबुन, डिटर्जेंट ,वॉशिंग प्रिपरेशन, ऑगेनिक्स ,पेय पदार्थ, स्पिरिट, सिरका,शस्त्र एवं गोला बारूद निर्माण, उर्वरक,घड़िया और खेल सामग्री निर्माण आदि को भी जोड़ा गया है. प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की इकाइयों के लिए प्रोत्साहन उच्च प्राथमिकता वाले पांच वर्ष के लिए 10 प्रतिशत ब्याज अनुदान देय होगा. सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों के लिए यह अनुदान 12 फीसदी तक हो सकता है. साथ ही अधिकतम स्वीकृत परियोजना की लागत का 50 फीसदी तक (40 करोड़ तक ) ब्याज अनुदान दिया जायेगा. प्राथमिकता वाले क्षेत्र में स्वीकृत परियोजना का अधिकतम 30 फीसदी ( 20 करोड़ तक ) अनुदान देय होगा. इसी तरह कर तथा एसजीएसटी संबंधी प्रोत्साहन में पांच वर्ष के लिए 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति और अनुमोदित परियोजना लागत का अधिकतम 100 प्रतिशत दिया जायेगा. इसके अलावा कई अन्य सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं. उद्योग विभाग ने साफ कर दिया है कि वैसी इकाइयां जिनके उत्पाद उच्च प्राथमिकता या प्राथमिकता वाले प्रक्षेत्र में वर्गीकृत नहीं है. एसआइपीबी उन उत्पादों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल करने का निर्णय ले सकती है.

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Published by: Rakesh ranjan

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