...खालसा मेरो रूप है खास खालसे में हउं करौ निवास से निहाल हुई संगत

patna news: पटना सिटी ..खालसा मेरो रूप है खास खालसे में हउं करौ निवास, ..सकल जगत में खालसा पंथ गाजै से जैसे शबद कीर्तन रागी जत्थों ने छेड़ा तो संगत निहाल हो उठी.

पटना सिटी

..खालसा मेरो रूप है खास खालसे में हउं करौ निवास, ..सकल जगत में खालसा पंथ गाजै से जैसे शबद कीर्तन रागी जत्थों ने छेड़ा तो संगत निहाल हो उठी. मौका था खालसा पंथ 326 वें साजना दिवस पर तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में सजे विशेष दीवान का. विशेष दीवान में रागी जत्थों में भाई जोगिंदर सिंह, बटाले वाले की बीबी प्रभजोत कौर व रुद्रपुर वाले रागी भाई गुरुविंदर सिंह ने शबद कीर्तन किया. कथा वाचक ज्ञानी दलजीत सिंह व ज्ञानी सुखदेव सिंह ने कथा कर खालसा की स्थापना के उद्देश्य को रखा. जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह ने अरदास व हुकूमनामा के साथ शस्त्र दर्शन से विशेष दीवान की समाप्ति की. फिर गुरु का अटूट लंगर चला. इससे पहले सुबह में आशा जी दी वार से आरंभ हुए धार्मिक कार्यक्रम में भाई हरभजन सिंह ने इसकी शुरुआत की, इसके बाद भाई नविंदर सिंह ने शबद कीर्तन किया. दो दिनों से अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी दिलीप सिंह की देखरेख में चल रहे श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ की समाप्ति के बाद विशेष दीवान सजा.

एकता के सूत्र में पिरोने का खालसा सशक्त माध्यम

विशेष दीवान में जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह, कथा वाचक ज्ञानी दलजीत सिंह व वक्ताओं ने कहा कि खालसा पंथ का सृजन करने वाले संत सिपाही व साहित्यकार गुरु गोविंद सिंह महाराज का जीवन दर्शन मानवता का संदेश देती है. गुरु महाराज के जीवन दर्शन में कहा था आज्ञा भई अकाल की, तभी चलाओ पंथ, अर्थात खालसा पंथ की नींव धर्म से परे हो कर, जीवन जीने के लिए रखा है. सर्वधर्म समभाव की शिक्षा के साथ समाज को एकता व अखंडता के सूत्र में पिरोने का खालसा सशक्त माध्यम है. विशेष दीवान में प्रो लाल मोहर उपाध्याय की रची पुस्तक खालसा प्रकाश महिमा का विमोचन जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह और अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी दिलीप सिंह ने की.

अमृत छक लिया दीक्षा, लंगर भी चला

खालसा सृजना दिवस पर सजे विशेष दीवान की समाप्ति के बाद तख्त साहिब के उपरि मंजिल पर अमृत बांटा का आयोजन में दर्जनों लोगों ने अमृत छक सिख पंथ की दीक्षा ली. बाललीला गुरुद्वारा में भी खालसा सृजना दिवस को ले बीते दो दिनों से चल रहे श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अखंड पाठ का समापन हुआ. इसके बाद बाबा गुरविंदर सिंह ने विश्व शांति व भाईचारे के लिए अरदास किया. फिर शबद कीर्तन व धार्मिक आयोजन के उपरांत गुरु का अटूट लंगर चला.

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