Lockdown : भूख से थके चेहरे और पैरों में पड़े फोड़े के साथ घर जाने की जिद

बिहार में दूसरे जिलों के फंसे मजदूरों का उनके गंतव्य यानी गृह जिलों तक पहुंचाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. अपने घर जाने के लिए पैदल ही निकले लोगों को सरकार के निर्देशों में जिला परिवहन विभाग द्वारा पूरी व्यवस्था की गयी है. इसके अलावा कोई पैदल, तो कोई साइकिल से, कोई रिक्शा, तो कोई टेंपो से सफर तय कर अपने गांव लौट रहा है. किसी को रास्ता नहीं मालूम, तो वह रेलवे ट्रैक के सहारे ही गंतव्य को निकल पड़ा है. गांव पहुंचने पर पंचायतों में बने क्वारंटाइन सेंटर में गांव पहुंचनेवाले लोगों को रखा जा रहा है. मालूम हो कि केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि शहरों से ग्रामीण इलाकों में जानेवाले 10 में से तीन व्यक्ति कोरोना वायरस ले जा रहे हैं.

पटना : बिहार में दूसरे जिलों के फंसे मजदूरों का उनके गंतव्य यानी गृह जिलों तक पहुंचाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है. अपने घर जाने के लिए पैदल ही निकले लोगों को सरकार के निर्देशों में जिला परिवहन विभाग द्वारा पूरी व्यवस्था की गयी है. इसके अलावा कोई पैदल, तो कोई साइकिल से, कोई रिक्शा, तो कोई टेंपो से सफर तय कर अपने गांव लौट रहा है. किसी को रास्ता नहीं मालूम, तो वह रेलवे ट्रैक के सहारे ही गंतव्य को निकल पड़ा है. गांव पहुंचने पर पंचायतों में बने क्वारंटाइन सेंटर में गांव पहुंचनेवाले लोगों को रखा जा रहा है. मालूम हो कि केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि शहरों से ग्रामीण इलाकों में जानेवाले 10 में से तीन व्यक्ति कोरोना वायरस ले जा रहे हैं.

शेखपुरा में मजदूरों को घर पहुंचाने का सिलसिला जारी

शेखपुरा जिले में दूसरे राज्यों से आ रहे मजदूरों को उनके गंतव्य यानी गृह जिलों तक पहुंचाने का सिलसिला जारी है. अपने घर जाने के लिए पैदल ही निकले लोगों को सरकार के निर्देश पर जिला परिवहन विभाग द्वारा व्यवस्था उपलब्ध करायी गयी है. अधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग ने 33 लोगों को पूर्णिया तक भेजा. इनमें नौ व्यक्ति लखीसराय, मुंगेर जिले के दो, भागलपुर के 14 और पूर्णिया के आठ लोग शामिल थे. सभी को गंतव्य तक पहुंचा दिया गया. इसके अलावा झारखंड के पाकुड़ जिले के 20 मजदूरों को भी उन्हें घर भेजने के लिए परिवहन विभाग द्वारा बस की व्यवस्था की जा रही है.

दूसरे प्रदेशों से आनेवाले लोगों को उन्हीं के घर में किया जा रहा क्वारंटाइन

बेगूसराय के खोदावंदपुर में दूसरे राज्यों से आनेवाले लोगों को उनके ही घरों में अलग रख कर कड़ी निगाह रखी जा रही है. उन्हें परिजनों से बिल्कुल अलग रखा जा रहा है. साथ ही खाने-पीने के लिए अलग बर्तन की व्यवस्था की गयी है. प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में ऐसे लोगों की संख्या करीब 500 है. बरियारपुर पश्चिमी पंचायत की मुखिया प्रेमलता देवी ने बताया कि बाहर से आनेवाले पांच लोगों को मध्य विद्यालय तारा बरियारपुर के क्वारंटाइन रूम में रखा गया है, जबकि 60 लोगों को उनके ही घर में अलग रखने की व्यवस्था की गयी है. दौलतपुर पंचायत के मुखिया सुरेंद्र पासवान ने बताया कि बाहर से 40 लोग आये हैं. उन्हें उनके ही घर में अलग कमरे में रखा गया है. बाड़ा पंचायत की मुखिया बेबी देवी ने बताया कि बाहर से आनेवाले छह लोगों को क्वारंटाइन रूम में रखा गया है. खोदावंदपुर पंचायत की मुखिया शोभा देवी ने बताया कि उनकी पंचायत में बाहर से आनेवाले 66 लोगों को उनके ही घरों में अलग रखा गया है. फफौत पंचायत की मुखिया किरण देवी ने बताया कि उनकी पंचायत में ऐसे लोगों की संख्या 95 है, जिन्हें उनके ही घरों में अलग रखकर उन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. मेघौल पंचायत के मुखिया पुरुषोत्तम सिंह, सागी की मुखिया अनिता देवी तथा बरियारपुर पूर्वी पंचायत के मुखिया मो माजिद हुसैन ने भी बाहर से आनेवाले लोगों को उनके ही घर में अलग रखा गया है.

छपरा : थके चेहरे और पैरों में पड़े फोड़े के साथ घर जाने की जिद

सारण जिले के दिघवारा में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन के बाद रेल, हवाई और सड़क यातायात ठप होने के बावजूद अपने घर को लौटने की जिद लोगों के चेहरे पर स्पष्ट दिख रही है. कोई पैदल, तो कोई साइकिल से, कोई रिक्शा, तो कोई टेंपो से सफर तय कर अपने गांव लौट रहा है. किसी को रास्ता नहीं मालूम, तो वह रेलवे ट्रैक के सहारे ही गंतव्य को निकल पड़ा है. ऐसा ही एक वाकया मंगलवार को दिघवारा पश्चिमी रेलवे ढाला के समीप देखने को मिला. एक साथ 18 लोग रेलवे ट्रैक के सहारे सीवान से कटिहार तक की दूरी पैदल ही तय करते नजर आये. करीब 500 किलोमीटर के सफर पर निकले मजदूरों का उत्साह टूट चुका था. फिर भी वे लोग धीरे-धीरे कदमों से अपने गांव की तरफ बढ़ रहे थे. मजदूरों में मदन शर्मा, अमीर हसन और जमीर हसन ने बताया कि वे लोग सीवान में ठेकेदार के माध्यम से रेलवे में ट्रैक पर गिट्टी डालने और हटाने का काम करते थे. लॉक डाउन की घोषणा के बाद मुंशी ने बिना कोई सूचना दिये मौके से फरार हो गया. मुंशी ने किसी को पैसा भी नहीं दिया. इसलिए वे लोग बिना पैसे के ही अपने सामान के साथ रविवार की रात को ही सीवान से अपने घर कटिहार के कुमुदपुर के लिए पैदल निकल गये. मजदूरों के पैरों में पड़े फोड़े उनकी परेशानी की कहानी बयां कर रहे थे.

दुश्वारियों का सफर, भूखे-प्यासे लौट रहे घर

बेगूसराय में दूसरे राज्यों से घर लौट रहे लोग बच्चों को गोद में लेकर पैदल ही परिवार के साथ रेलवे लाइन के सहारे आ रहे हैं. उन लोगों ने बताया कि रास्ते में पुलिस ने जगह-जगह रोका जरूर, लेकिन जब भोजन और पैसे नहीं होने का हवाला दिया, तो पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया. जयपुर से पैदल आ रहे नवगछिया के रमाकांत, दिलीप, भोला जैसे दर्जनों राहगीरों को स्थानीय लोगों ने पहले सेनेटाइज किया, फिर आगे जाने दिया. जयपुर से लौट रहे राजेंद्र राय और गोरखनाथ ने बताया कि रास्ते में उचक्कों ने उनसे चार हजार रुपया भी छीन लिये. वहीं, दिल्ली की कंपनी में काम करनेवाले अजय सिंह, धीरज सिंह, रंजीत सिंह, श्रीराम, सुनील, विवेक को बीहट चांदनी चौक पर भारतीय सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने रोका और भोजन कराया. इसके बाद सूचना पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की टीम ने इनकी स्क्रीनिंग की. सब कुछ ठीक होने पर उन्हें गंतव्य की ओर विदा कर दिया गया.

कोरोना से शायद बच जायें, लेकिन भूख से मर जायेंगे ‘साहब’

सीवान के जीरादेई से सूचना है कि कोई पैदल लौट रहा है, तो कोई साइकिल या ठेले पर अपनों का बोझ उठा रहा है. कुछ मजदूर गैस सिलेंडर लदे ट्रक पर सवार होकर घर लौट रहे हैं. घर लौट रहे लोगों का कहना है कि कई दिनों से से चल रहे हैं. पैदल चल रहे लोगों ने बताया कि दो-तीन दिन से खाना भी नसीब नहीं हुआ है. किसी की गोद में सात

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Published by: Kaushal kishor

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