पटना. भाद्रपद शुक्ल एकादशी के पावन अवसर पर 22 सितंबर यानी मंगलवार को कर्मा-धर्मा एकादशी का व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जाएगा. इस बार यह व्रत उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के दुर्लभ युग्म संयोग, विष्णु शृंखल योग और सुकर्म योग के महासंयोग में पड़ रहा है. इस मंगलकारी योग में गृहस्थ और वैष्णवजन उपवास रखेंगे. बहनें अपने भाइयों की सुख-समृद्धि, दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सलामती के लिए विधि-विधान से व्रत व अनुष्ठान करेंगी.
21 को नहाय-खाय, 23 सितंबर को होगा पारण
ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि व्रती महिलाएं 21 सितंबर यानी सोमवार को दशमी तिथि के दिन नहाय-खाय के साथ सात्विक अरवा भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेंगी. इसके बाद 22 सितंबर को एकादशी के दिन श्रद्धालु अपनी सामर्थ्यानुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखेंगे. व्रत का विधिवत पारण 23 सितंबर को द्वादशी तिथि में सूर्योदय के पश्चात पूजा-अर्चना के बाद संपन्न होगा.
पद्मा एकादशी पर करवट बदलते हैं भगवान विष्णु
धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस एकादशी को पार्श्व परिवर्तनी एकादशी और पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान पाताल लोक में क्षीरसागर में शयन कर रहे भगवान श्रीहरि विष्णु इस पुण्य तिथि पर करवट बदलते हैं. यही कारण है कि सनातन परंपरा में इस एकादशी का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
कुश और राढ़ी घास से बनेगी नारायण की प्रतिमा
कर्मा-धर्मा एकादशी के पूजन विधान में प्रकृति और पारंपरिक आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है. इस दिन विशेष रूप से कुश और राढ़ी घास से भगवान श्रीहरि नारायण की सुंदर प्रतिमा गढ़ी जाएगी. इसके पश्चात रोली, चंदन, पंचामृत, ताजे फूल, दूर्वा, धूप-दीप और ऋतु फलों के नैवेद्य से प्रभु की षोडशोपचार पूजा संपन्न होगी. मुख्य पूजन के साथ गौरी-गणेश और देवाधिदेव महादेव का भी आह्वान किया जाएगा.
नदी-सरोवर घाटों और आंगनों में होगा जागरण
यह पावन पूजन नदी तटों, पोखरों, घर के पवित्र आंगनों या छतों पर खुले आकाश के नीचे संपन्न किया जाएगा. कर्मा-धर्मा पर्व पर रातभर जागरण की विशेष परंपरा है. व्रत रखने वाली महिलाएं और युवतियां रात में पारंपरिक लोकगीतों, कर्मा-धर्मा की पौराणिक कथाओं और भक्तिमय भजन-कीर्तन के जरिए भगवान विष्णु की स्तुति करेंगी, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहेगा.
