'पवन सिंह नहीं आते तो 1 लाख नहीं, इतने वोटों से जीतते', क्या पावर स्टार ने B टीम बनकर बिगाड़ा था खेल? सांसद राजाराम सिंह ने दो साल बाद खोला राज

कराकाट लोकसभा सीट के सांसद राजाराम सिंह ने दावा किया है कि यदि पवन सिंह चुनाव नहीं लड़ते तो उनकी जीत का अंतर 2 लाख वोटों का होता. जानिए इस दावे के पीछे का चुनावी गणित और राजाराम सिंह का पूरा बयान.

Karakat MP Rajaram Singh On Pawan Singh: बिहार की सियासत में कराकाट लोकसभा सीट का चुनाव लंबे समय तक चर्चा में रहा. एक तरफ भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह निर्दलीय मैदान में थे, तो दूसरी ओर महागठबंधन की ओर से सीपीआई (माले) के राजाराम सिंह चुनाव लड़ रहे थे. नतीजे आए तो राजाराम सिंह ने 1,05,858 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. अब उन्होंने उस चुनाव की पूरी कहानी बताते हुए पवन सिंह की चुनावी एंट्री और अपनी जीत को लेकर बड़ा दावा किया है.

‘पवन सिंह नहीं आते तो दो लाख के मार्जिन से जीतते’

राजाराम सिंह के मुताबिक कराकाट में उनकी जीत महज चुनाव प्रचार के कुछ दिनों का नतीजा नहीं थी, बल्कि वर्षों से आम लोगों, गरीबों और किसानों के बीच किए गए संघर्ष का परिणाम थी. उन्होंने कहा कि कराकाट में इंडिया गठबंधन की लहर थी और बाकी उम्मीदवारों ने वोट काटने का काम किया.

पवन सिंह के समर्थकों की ओर से उनकी जीत को पवन सिंह की वजह से जोड़ने वाले दावों पर राजाराम सिंह ने कहा कि अगर पवन सिंह चुनाव मैदान में नहीं आते, तो उनकी जीत का अंतर करीब दो लाख वोटों का होता.

राजाराम सिंह ने कहा, “पवन सिंह अगर नहीं आते चुनाव में, तो यहां हम लोग दो लाख के मार्जिन से जीतते हैं. एक लाख पांच हजार नहीं, दो लाख के मार्जिन से जीतते हैं.”

हालांकि, यह राजाराम सिंह का राजनीतिक दावा है. 2024 के आधिकारिक चुनाव परिणाम में उनकी जीत का अंतर 1,05,858 वोट रहा था.

कराकाट में क्या रहा था चुनावी गणित?

2024 के लोकसभा चुनाव में कराकाट सीट पर राजाराम सिंह को 3,80,581 वोट मिले थे. निर्दलीय उम्मीदवार पवन सिंह 2,74,723 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा को 2,53,876 वोट मिले.

यानी राजाराम सिंह ने पवन सिंह को 1,05,858 वोट से हराया था. वहीं पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के बीच वोटों का अंतर सिर्फ 20,847 वोट रहा.

यही चुनावी गणित कराकाट के मुकाबले को खास बनाता है. पवन सिंह की मौजूदगी ने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था और चुनाव परिणाम के बाद यह सवाल भी खूब उठा कि अगर पवन सिंह मैदान में नहीं होते तो वोटों का बंटवारा किस तरह होता.

‘जिस दिन टिकट मिला, उसी दिन जीत तय हो गई थी’

राजाराम सिंह ने दावा किया कि कराकाट में महागठबंधन की जमीन पहले से मजबूत थी. उनके मुताबिक जिस दिन महागठबंधन की ओर से उन्हें टिकट मिला, उसी दिन उनकी जीत की नींव पड़ गई थी.

उन्होंने कहा कि कराकाट में इंडिया गठबंधन की लहर थी और चुनाव को लेकर सर्वे करने वाले कई लोगों और मीडिया कर्मियों ने भी इस माहौल को महसूस किया था.

राजाराम सिंह के अनुसार, यह लहर सिर्फ चुनाव प्रचार के दौरान नहीं बनी थी. उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष, गरीबों और आम जनता के मुद्दों तथा किसान आंदोलन को भी इसका आधार बताया. उन्होंने औरंगाबाद में सामाजिक न्याय से जुड़े आंदोलनों का भी जिक्र किया.

‘बिना शोर-शराबे के कछुए की चाल चलते रहे राजाराम सिंह’

कराकाट का चुनाव इसलिए भी दिलचस्प रहा क्योंकि एक तरफ पवन सिंह की स्टार पावर थी. भोजपुरी फिल्मों और संगीत की दुनिया में लोकप्रिय पवन सिंह जब चुनाव मैदान में उतरे तो मुकाबला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया.

दूसरी ओर राजाराम सिंह की छवि अपेक्षाकृत सादगी और जमीनी राजनीति से जुड़े नेता की रही. चुनावी माहौल में पवन सिंह की रैलियों और लोकप्रियता के बीच राजाराम सिंह लगातार अपने संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ मैदान में डटे रहे.

राजाराम सिंह ने इसी अंतर को अपनी जीत की वजहों में गिनाते हुए कहा कि वह बिना किसी तामझाम और शोर-शराबे के लगातार काम करते रहे.

पवन सिंह के समर्थकों के दावे पर क्या बोले राजाराम?

राजाराम सिंह से जब पूछा गया कि पवन सिंह के समर्थक उनकी जीत को पवन सिंह की वजह से जोड़ते हैं, तो उन्होंने इस दावे को खारिज किया. उनका कहना था कि कराकाट में उनकी अपनी राजनीतिक जमीन थी और पवन सिंह की गैरमौजूदगी में भी वह बड़ी जीत हासिल करते.

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में पवन सिंह की मौजूदगी से वोटों का विभाजन हुआ, लेकिन इससे उनकी जीत की बुनियाद नहीं बदली.

पवन सिंह के MLC बनने पर भी राजाराम ने साधा निशाना

बातचीत के दौरान पवन सिंह के बाद में एमएलसी बनने के मुद्दे पर भी राजाराम सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है और उन्होंने पवन सिंह के चुनाव लड़ने पर कभी आपत्ति नहीं जताई.

हालांकि, उन्होंने पवन सिंह से एक राजनीतिक सवाल जरूर पूछा था. राजाराम सिंह ने कहा कि जब केंद्र में मोदी सरकार के दौर में कथित तौर पर अभिव्यक्ति और पत्रकारिता से जुड़े सवाल उठे, तब कई पत्रकारों, फिल्मकारों और साहित्यकारों ने पुरस्कार लौटाए थे. उन्होंने सवाल किया कि उस समय पवन सिंह कहां खड़े थे.

एमएलसी बनने पर शुभकामना देने के सवाल पर राजाराम सिंह ने कहा कि जब पवन सिंह भाजपा के समर्थन से एमएलसी बने हैं तो उनकी ओर से शुभकामना देने का कोई सवाल नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि पवन सिंह युवा हैं और उन्हें अपना मेहनत करना चाहिए.

2024 में कराकाट का नतीजा क्या रहा था?

कराकाट लोकसभा चुनाव 2024 में राजाराम सिंह को 3,80,581 वोट मिले थे. वहीं पवन सिंह को 2,74,723 और उपेंद्र कुशवाहा को 2,53,876 वोट मिले थे. राजाराम सिंह ने पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा दोनों को पीछे छोड़ते हुए 1,05,858 वोटों से चुनाव जीता था. यही नतीजा कराकाट को 2024 के लोकसभा चुनाव की सबसे चर्चित सीटों में शामिल करने की बड़ी वजह बना था.

अब सांसद राजाराम सिंह का यह बयान एक बार फिर उसी चुनाव की याद दिला रहा है- जहां एक तरफ स्टारडम था, दूसरी तरफ जमीनी राजनीति; एक तरफ पवन सिंह की लोकप्रियता थी, तो दूसरी तरफ राजाराम सिंह का संगठन और राजनीतिक अनुभव. चुनाव खत्म होने के दो साल बाद भी कराकाट की वह सियासी भिड़ंत बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है.

Also Read: नेपाल की बाढ़ में ‘आपदा में अवसर’! उफनती गंडक में जान जोखिम में डालकर सिलेंडर-लकड़ी बटोर रहे लोग


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By विकाश झा

विकाश झा डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में छह वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में स्नातक तथा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है. स्पोर्ट्स, हाइपरलोकल और पॉलिटिकल पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता के क्षेत्र हैं. क्रिकेट, समाज और राजनीति से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है. वे तथ्य आधारित, प्रभावशाली और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करने में रुचि रखते हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >