दानापुर में खतरे के निशान से ऊपर पहुंची गंगा, दियारा के दर्जनों गांव जलमग्न, सैकड़ों बीघे फसल डूबी

दानापुर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे दियारा क्षेत्र के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. सैकड़ों बीघे फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है.

Diyara Jalmagn : दानापुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने दियारा क्षेत्र के लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. पिछले 24 घंटे से लगातार नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है और शनिवार सुबह गंगा खतरे के निशान से 5 इंच ऊपर बह रही थी. देवनानाला में गंगा का जलस्तर 167.20 फुट रिकॉर्ड किया गया है. नदी का पानी दियारे के निचले और तटवर्ती इलाकों में फैलने के बाद छह पंचायतों के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. कई घरों में पानी घुस चुका है, जबकि सैकड़ों बीघे में लगी मकई और हरी सब्जियों की फसल डूब गई है.

बाढ़ का पानी बढ़ने से दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामने आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है. ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर सड़कों पर डेढ़ से दो फुट तक पानी बह रहा है, जबकि खेतों में पानी की गहराई दो से तीन फुट तक पहुंच गई है. इससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है.

छह पंचायतों के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में

बाढ़ के पानी से गंगहरा, हेतनपुर, पतलापुर, कासीमचक, पुरानी पानापुर, मानस और अकिलपुर पंचायतों के दर्जनों गांव प्रभावित हुए हैं. निचले इलाकों में पानी तेजी से फैलने के कारण कई घरों के आसपास जलजमाव की स्थिति बन गई है. कुछ घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है, जिससे परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

ग्रामीणों ने बताया कि पानी बढ़ने के कारण खेतों में खड़ी फसल पूरी तरह डूब गई है. खासकर मकई और हरी सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने की स्थिति में फसल के पूरी तरह बर्बाद होने की आशंका है.

प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य नहीं हुआ शुरू

बाढ़ प्रभावित लोगों का कहना है कि पानी बढ़ने के बावजूद अभी तक प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है. कई परिवार ऐसे हैं जो पानी से घिरे होने के कारण सुरक्षित स्थानों पर जाने में भी सक्षम नहीं हैं. कुछ लोग अपने घरों के पास मचान बनाकर परिवार के साथ रात गुजारने को मजबूर हैं.

पलायन की जगह मचान पर रात गुजार रहे ग्रामीण

दियारा क्षेत्र में बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद ग्रामीणों की चिंता लगातार बढ़ रही है. पानी से घिरे परिवारों के सामने समस्या सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि नाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण वे अपने परिवार और सामान के साथ दूसरे स्थानों पर नहीं जा पा रहे हैं.

बाढ़ प्रभावित परिवारों को रात में भी पानी बढ़ने की चिंता सताती रहती है. कई लोग घर के आसपास मचान बनाकर जरूरी सामान के साथ रह रहे हैं. ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द नाव उपलब्ध कराने और प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की है.

नेतानों ने मुख्यमंत्री की नाव चलाने की मांग

पूर्व जिला पार्षद ओम प्रकाश यादव, जदयू नेता संजय सिंह, पूर्व प्रमुख मनोज यादव, सोनू यादव, दिनेश राय और जयपाल यादव ने मुख्यमंत्री, आपदा प्रबंधन मंत्री और संबंधित अधिकारियों से दियारा क्षेत्र में सरकारी स्तर पर नाव चलाने की मांग की है. उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत और बचाव कार्य शुरू करने की भी मांग की है.

आगे और बढ़ सकता है गंगा का जलस्तर

बाढ़ नियंत्रण केंद्र के अनुसार दानापुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 5 इंच ऊपर दर्ज किया गया है. शनिवार सुबह देवनानाला में जलस्तर 167.20 फुट रिकॉर्ड किया गया. नदी के जलस्तर में फिलहाल धीरे-धीरे वृद्धि जारी है.

कनीय अभियंता के अनुसार गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इलाहाबाद, बनारस और बक्सर में भी गंगा के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है. ऐसे में आने वाले समय में दानापुर में भी नदी का पानी और बढ़ने की संभावना जताई गई है.

वहीं, इंद्रपुरी में सोन नदी का जलस्तर फिलहाल स्थिर बताया गया है. अधिकारियों की नजर गंगा और सोन दोनों नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है, ताकि स्थिति बिगड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें.

प्रशासन ने बताया, स्थिति पर रखी जा रही नजर

दानापुर के सीओ ने बताया कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सजग है. प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है. हालांकि, उन्होंने बताया कि अभी तक जिला प्रशासन की ओर से सरकारी स्तर पर नाव परिचालन का आदेश प्राप्त नहीं हुआ है.

गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए दियारा क्षेत्र के लोगों की नजर अब प्रशासन की ओर से राहत और बचाव की व्यवस्था पर है. ग्रामीणों को आशंका है कि यदि नदी का पानी इसी तरह बढ़ता रहा, तो और अधिक गांवों में पानी प्रवेश कर सकता है और फसलों के साथ-साथ घरों को भी नुकसान पहुंच सकता है.

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By संजय कुमार

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