Patna Ganga erosion: पटना जिले के मनेर प्रखंड क्षेत्र के गोरैया स्थान स्थित नीलकंठ टोला और जीवराखन टोला गांव के समीप गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने के बाद कटाव तेज हो गया है. कटाव की वजह से किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है, जिससे ग्रामीणों और किसानों में चिंता का माहौल है.
तेजी से कट रही खेती योग्य भूमि
स्थानीय लोगों के अनुसार लगातार बारिश और गंगा नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के कारण घाट के समीप कटाव काफी तेज हो गया है. कटाव की चपेट में आकर खेती योग्य भूमि नदी में विलीन हो रही है. इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि कटाव की रफ्तार इतनी अधिक है कि हर दिन कई कट्ठे जमीन गंगा में समा रही है. इससे आसपास के लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है.
किसानों ने प्रशासन को दी सूचना
कटाव से प्रभावित किसानों ने इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को दी है. किसानों का कहना है कि यदि समय रहते रोकथाम के उपाय नहीं किए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है. स्थानीय समाजसेवियों ने भी आसपास के गांवों के लोगों को कटाव वाले क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके.
पंचायत समिति सदस्य ने उठाए सवाल
पंचायत समिति सदस्य धर्म भाई यादव ने कहा कि गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण किसानों की जमीन लगातार कटाव की भेंट चढ़ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि कटाव रोकने के लिए लगाए जा रहे जियो बैग के कार्य में अनियमितता बरती जा रही है. उनका कहना है कि जियो बैग में निर्धारित मानकों के अनुसार बालू भरने के बजाय अधिक मात्रा में मिट्टी भरी जा रही है, जिससे कटाव रोकने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है.
हर दिन 8 से 10 कट्ठे जमीन हो रही प्रभावित
स्थानीय किसान महेश कुमार ने बताया कि नीलकंठ टोला-जीवराखन टोला घाट के पास गंगा की तेज धारा के कारण प्रतिदिन लगभग 8 से 10 कट्ठे खेती योग्य भूमि नदी में समा रही है. इससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है. उन्होंने भी जियो बैग निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं हुआ तो कटाव रोकना मुश्किल होगा.
प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों और किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कटाव प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल निरीक्षण कर प्रभावी सुरक्षा उपाय किए जाएं. साथ ही कटाव रोधी कार्यों की गुणवत्ता की जांच कर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों की जमीन और गांवों को बचाया जा सके.
