इंतजार खत्म! पटना-दिल्ली रूट पर इस महीने से दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, जानें इसकी स्पीड और सुविधाएं

Vande Bharat Sleeper Train: बिहार के लोगों के लिए खुशखबरी है. बिहार से बड़ी संख्या में लोग देश की राजधानी दिल्ली जाते हैं. इस रूट पर भारतीय रेलवे समय-समय पर स्पेशल ट्रेन चलवाती है. अब इस रूट पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलेगी. इस ट्रेन को लेकर क्या अपडेट आया है, आइये जानते हैं.

Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे ने बिहार से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को बड़ा तोहफा दिया है. जल्द ही वंदे भारत स्लीपर ट्रेन इस रूट पर चलती नजर आएगी. भारतीय रेलवे के मुताबिक दिसंबर महीने के अंत से यह आधुनिक ट्रेन दिल्ली और पटना के बीच दौड़ने लगेगी. बेंगलुरु स्थित बीईएमएल फैक्ट्री में इसके दो रैक तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें से एक की फिनिशिंग पूरी हो चुकी है. पहला रैक 12 दिसंबर को बेंगलुरु से रवाना होगा, जिसके बाद दिल्ली- पटना रूट पर इसका ट्रायल रन किया जाएगा.

सप्ताह में 6 दिन चलेगी ट्रेन

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का परिचालन सप्ताह में छह दिन किया जाएगा. फिलहाल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी सप्ताह में छह दिन ही चलती है. पटना से यह ट्रेन तेजस राजधानी की टाइम-टेबल के आसपास शाम को रवाना होगी और अगले दिन सुबह दिल्ली पहुंचेगी. वापसी में भी इसकी टाइमिंग तेजस राजधानी के समय के करीब ही रखी जाएगी ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके.

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के अंदर की तस्वीर

ट्रेन में क्या-क्या सुविधा होगी

इस स्लीपर वंदे भारत ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे और अलग-अलग श्रेणियों में मिलाकर 827 बर्थ उपलब्ध होंगी. इसमें थर्ड एसी के 11 कोच, सेकेंड एसी के चार और फर्स्ट एसी का एक कोच लगाया गया है. दानापुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार, इस महीने के अंत तक ट्रेन का संचालन शुरू होने की तैयारी पूरी कर ली जाएगी.

यह ट्रेन कई आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी, जिनमें आटोमेटिक दरवाजे, बायो-टॉयलेट, सीसीटीवी कैमरे, रीडिंग लाइट्स और आरामदायक इंटीरियर शामिल हैं. 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिजाइन की गई इस ट्रेन में कवच सिस्टम और क्रैश-प्रूफ ढांचा जैसी लेटेस्ट सुरक्षा तकनीकें भी मौजूद होंगी.

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लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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