हरी चुनरी, चूड़ियों की खनक और फिल्मी गीतों पर थिरके कदम, सावन महोत्सव में झूमीं महिलाएं

पटना में भूमिहार महिला समाज द्वारा आयोजित 'हरीतिमा सावन महोत्सव' में महिलाओं ने सावन के उल्लास और हरियाली का जमकर आनंद लिया. पारंपरिक गीतों पर नृत्य और एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटने का यह अवसर बेहद खास रहा.

Sawan Festival : (दानापुर) सगुना मोड़ स्थित बैंक्वेट हॉल में भूमिहार महिला समाज की ओर से रविवार को हरीतिमा सावन महोत्सव का आयोजन किया गया. सावन की हरियाली और उल्लास से सराबोर इस समारोह में पूरे बिहार से भूमिहार समाज की महिलाएं हरे रंग के परिधानों और चूड़ियों में सज-धजकर शामिल हुईं. महिलाओं ने सावन के गीतों और फिल्मी गानों पर नृत्य प्रस्तुत कर समारोह में रंग जमा दिया.

दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना से हुई. इसके बाद महिलाओं ने सावन के पारंपरिक गीतों के साथ बॉलीवुड के लोकप्रिय गानों पर जमकर नृत्य किया. ‘सावन में लग गई आग’, ‘टिप-टिप बरसा पानी’ और ‘नाचूं आज छम-छम’ जैसे गीतों पर महिलाओं ने शानदार प्रस्तुति देकर समारोह में चार चांद लगा दिए. ‘जब-जब चूड़ी खनके’ और ‘मेरी चूड़ियां मेरी बिंदिया’ जैसे गीतों से पूरा माहौल गुलजार हो गया.


भक्ति गीतों पर थिरकतीं महिलाएं

हरे परिधानों में दिखी सावन की छटा

समारोह में शामिल महिलाएं हरे रंग के परिधानों और चूड़ियों में नजर आईं. विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और कला का प्रदर्शन किया. सामूहिक नृत्य और गीतों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया.

महिलाओं को एक मंच पर लाना उद्देश्य

भूमिहार महिला समाज की संस्थापक प्रीति प्रिया ने कहा कि हरीतिमा सावन महोत्सव का उद्देश्य समाज की महिलाओं को एक मंच पर लाकर सावन की परंपरा, संस्कृति और उत्सव की भावना को साझा करना है. हर वर्ष पूरे बिहार से भूमिहार समाज की महिलाएं हरे परिधानों में एकत्रित होकर सावन का उत्सव मनाती हैं. उन्होंने कहा कि भगवान शिव से प्रार्थना है कि उनकी कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और हरियाली बनी रहे.

सावन महिलाओं के लिए उमंग और खुशियों का पर्व

उन्होंने कहा कि सावन भगवान शिव की आराधना और प्रकृति के प्रति उत्सव का पर्व है. इसी भावना के साथ महिलाएं मिलकर इस महोत्सव को उत्साहपूर्वक मनाती हैं. संस्था की सदस्यों ने कहा कि महिलाएं वर्षभर घर के कामकाज में व्यस्त रहती हैं. सावन का यह आयोजन उन्हें एक साथ मिलकर खुलकर खुशियां मनाने का अवसर देता है. हरीतिमा सावन महोत्सव महिलाओं के लिए सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि उमंग और खुशियों का पर्व भी है. हरे रंग के परिधान सावन की हरियाली, ताजगी और सुंदरता के प्रतीक हैं.

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तीन सौ से अधिक महिलाओं ने लिया हिस्सा

समारोह में भावना भूषण, विधुरानी, संध्या सरकार, पूनम शर्मा, संगीता सिंह, अनिता राय, नेहा, नेहा रंजन, प्रज्ञा, ममता, भावना भारद्वाज, अमरावती, निशा और रश्मि सहित तीन सौ से अधिक महिलाएं मौजूद रहीं. महिलाओं ने सामूहिक रूप से कार्यक्रम का आनंद लिया और सावन के रंग में रंगकर महोत्सव को यादगार बना दिया.

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By Sanjay kumar

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