दानापुर में बाढ़ राहत पर बैठक के बीच शोर-शराबा, पंचायतों को बाढ़ग्रस्त घोषित करने की मांग; राहत सामग्री पर भी हुआ विवाद

दानापुर में बाढ़ राहत को लेकर हुई प्रखंड राहत सह अनुश्रवण समिति की बैठक में जमकर हंगामा हुआ. जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बाढ़ पीड़ितों के लिए पर्याप्त राहत सामग्री और नावों की मांग की.

Flood Relief: प्रखंड कार्यालय के सभागार में मंगलवार को प्रखंड राहत सह अनुश्रवण समिति की बैठक शोर-शराबे और हो-हंगामे के बीच हुई. प्रखंड प्रमुख वंदना राय की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में दियारा क्षेत्र की छह पंचायतों में बाढ़ से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा की गयी. बैठक में राहत एवं बचाव कार्य, नाव परिचालन और प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री वितरण को लेकर जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाये.

राहत सामग्री के पैकेट की संख्या पर जनप्रतिनिधियों ने जताया विरोध

बैठक में सीओ दिलीप कुमार गुप्ता ने प्रत्येक पंचायत में 400-400 पैकेट चूड़ा-गुड़ वितरित करने की बात कही. इस पर जनप्रतिनिधियों ने विरोध जताया. उनका कहना था कि इतनी कम मात्रा में राहत सामग्री का वितरण संभव नहीं है. जनप्रतिनिधियों ने सीओ से अपने स्तर से राहत सामग्री का वितरण कराने की मांग की.

मंत्री रामकृपाल यादव ने बाढ़ पीड़ितों के बीच मानक के अनुसार पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. उन्होंने एसडीओ और सीओ से प्रभावित लोगों के बीच पर्याप्त राहत सामग्री वितरण सुनिश्चित करने को कहा.

छह दियारा पंचायतों में नाव उपलब्ध कराने की मांग

बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि दियारा क्षेत्र की छह पंचायतों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. इसके बावजूद पर्याप्त संख्या में सरकारी नावों का परिचालन नहीं किया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि अंचल के अधीन 24 नावें होने के बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इनका पर्याप्त उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है.

गंगाहरा पंचायत के मुखिया विजय कुमार, पुरानी पानापुर के मुखिया सुभाष यादव और पंसस विजेंद्र कुमार ने कहा कि दियारा क्षेत्र में बाढ़ से भयावह स्थिति उत्पन्न होने के बाद भी पर्याप्त सरकारी नावें उपलब्ध नहीं करायी जा रही हैं.

बाढ़ग्रस्त पंचायत घोषित करने की मांग

बैठक में सदस्यों ने कहा कि दियारा क्षेत्र की पंचायतें और गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं. बाढ़ से क्षेत्र में भारी क्षति हुई है. जनप्रतिनिधियों ने दियारा की बाढ़ प्रभावित पंचायतों को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र घोषित करने और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की मांग की.

सदस्यों ने यह भी कहा कि बाढ़ से पहले तैयारी किये जाने का दावा किया जाता है, लेकिन बाढ़ आने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त नाव और राहत व्यवस्था नहीं दिख रही है.

सांसद ने बाढ़ राहत कार्यों की ली जानकारी

बैठक में सांसद डॉ. मीसा भारती ने कहा कि अभी तक राज्य सरकार की ओर से 12 जिलों में बाढ़ घोषित नहीं की गयी है. उन्होंने दियारा के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नाव परिचालन और राहत कार्यों की जानकारी ली. उन्होंने सीडीपीओ और मनरेगा पदाधिकारी से भी बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच चल रहे कार्यों के संबंध में जानकारी ली.

राहत शिविर में दो समय भोजन की व्यवस्था

मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि बाढ़ से विस्थापित परिवारों के लिए बलदेव स्कूल में बाढ़ राहत शिविर सह सामुदायिक किचन चलाया जा रहा है, जहां दोनों समय भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है.

बैठक में मंत्री ने उपस्थित नहीं रहने वाले अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश भी दिया. बैठक में एसडीओ वीरूपाक्ष विक्रम सिंह, सीओ दिलीप कुमार गुप्ता, बीडीओ आलोक कुमार, बीस सूत्री अध्यक्ष ब्रजेश कुमार सिंह, उपाध्यक्ष मनोज कुमार, पंसस संतोष कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे.

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By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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