Cyber Crime: पुराना फोन बेचते हैं, तो हो जाएं सावधान! साइबर ठगों का नया जाल, निकाल रहे पुराना डेटा

Cyber Crime: डिजिटल जमाने में पुराने मोबाइल फोन बेचना आम हो गया है, लेकिन यह आपकी निजी जानकारी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. साइबर अपराधी पुराने फोन से डेटा रिकवर कर ठगी और ब्लैकमेलिंग जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. इससे सतर्क रहना बेहद जरूरी है.

Cyber Crime: आज के डिजिटल युग में हर महीने नए मोबाइल फोन आ रहे हैं, ऐसे में पुराना फोन बेचना आम बात हो गई है. लेकिन सावधान! यह आपके लिए बड़ा खतरा बन सकता है. मुजफ्फरपुर और उत्तर बिहार के जिलों में साइबर अपराधी पुराने फोन का इस्तेमाल कर लोगों की निजी जानकारी चुरा रहे हैं, जिससे साइबर अपराध के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. पिछले छह महीनों में इस तरह की ठगी के दर्जनों मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों ने अपने पुराने फोन बेचने के बाद लाखों रुपये गंवा दिए हैं.

सस्ते में खरीदकर करते हैं डेटा रिकवर, फिर करते हैं ठगी

जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधी पुराने फोन को सस्ते दामों पर खरीदते हैं और फिर उन्हें साइबर अपराध से जुड़े लोगों को बेच देते हैं. ये अपराधी फोन को ”फैक्ट्री रीसेट” करने के बाद भी विशेष सॉफ्टवेयर का उपयोग कर पुराने डेटा को रिकवर कर लेते हैं. उत्तर बिहार के कई जिलों में यह गिरोह सक्रिय है और खासकर उन लोगों को निशाना बनाता है जो तकनीकी रूप से ज्यादा जानकार नहीं होते.

साइबर सेल के अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में अपराधियों ने पुराने फोन के आइएमइआइ नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी सिम कार्ड और अकाउंट्स बनवाए हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो रहा है.

खतरनाक है यह डेटा रिकवरी, निजी जानकारी का हो रहा दुरुपयोग

एक बार डेटा रिकवर होने के बाद, साइबर अपराधी आपके बैंकिंग ऐप्स की जानकारी, सोशल मीडिया अकाउंट्स के पासवर्ड और आपकी निजी तस्वीरें व वीडियो चुरा लेते हैं. इस संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग, बैंक अकाउंट से पैसे निकालने और यहां तक कि फर्जीवाडे के लिए भी किया जा रहा है.

बंगाल का फेरीवाला गांव-गांव घूमकर खरीदता है पुराने मोबाइल

मुजफ्फरपुर सहित उत्तर बिहार के अलग-अलग जिलों में पश्चिम बंगाल का एक लड़का फेरीवाला बनकर घूमता है. वह घरेलू सामान के बदले टूटे-फूटे व पुराने मोबाइल फोन खरीदता है. हैरानी की बात यह है कि ये फोन कहां ले जाए जाते हैं और किसे बेचे जाते हैं, इसकी जानकारी न तो जिला पुलिस के पास है और न ही इस पर कोई जांच होती है. जबकि कई बडे साइबर फ्रॉड का जाल पश्चिम बंगाल से जुडा है. आशंका है कि इन्हीं पुराने मोबाइल फोन के आईएमईआई का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड में किया जा रहा है.

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मोबाइल बेचने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अपने पुराने मोबाइल फोन को बेचने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं, ताकि आप साइबर ठगी का शिकार होने से बच सकें:

फैक्ट्री रीसेट के बाद भी रहें सतर्क: सिर्फ फैक्ट्री रीसेट करना काफी नहीं है. फोन बेचने से पहले उसमें कुछ बडी फाइलें (जैसे बडी वीडियो फाइलें) भरें और फिर से फैक्ट्री रीसेट करें, ताकि पुराना डेटा पूरी तरह से मिट जाए और रिकवर न हो सके.

सभी अकाउंट से लॉग आउट करें: गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप और बैंकिंग ऐप्स सहित सभी अकाउंट से लॉग आउट किए बिना फोन न बेचें.

सिम और मेमोरी कार्ड निकालें: फोन से सिम कार्ड और मेमोरी कार्ड निकालना कभी न भूलें. यह सुनिश्चित करें कि कोई भी व्यक्तिगत डेटा फोन में न रह जाए.

विश्वसनीय दुकान से बेचें: यदि आप अपना फोन बेच रहे हैं, तो किसी विश्वसनीय दुकान या प्रमाणित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें, जहां डेटा सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता हो.

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Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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