पटना से हिमांशु देव की रिपोर्ट
Patna News : ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमावली व सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पटना नगर निगम ने शहर के थोक अपशिष्ट उत्पादकों के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के पोर्टल पर पंजीकरण कराने का अभियान तेज कर दिया है. इसी सिलसिले में नगर निगम द्वारा अभियान शुरू किया गया है.
53 बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान हुई
इसके जरिए आइजीआइएमएस, पारस, रूबन अस्पताल, ताज, चाणक्य होटल सहित लगभग 35 बड़े संस्थानों को अब तक नए नियम के बारे में बताया गया है. वहीं, निगम अब तक शहर में ऐसे 53 बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान कर चुका है. पंजीकरण के बाद निगम की टीम मौके पर जाकर आंकड़ों की जांच करेगी.
नियमों की अनदेखी पर पांच से 25 हजार तक जुर्माना
नियमों की अनदेखी करने या रजिस्ट्रेशन न कराने वाले बड़े संस्थानों पर पांच हजार से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, साथ ही उनकी कचरा उठाने की सेवा भी बंद की जा सकती है. हालांकि, (https://uatswm.cpcb.gov.in/register) पर जाकर तुरंत अपना ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा. यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क है.
40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत करने वाले भी थोक कचरा उत्पादक
नियमों के मुताबिक ऐसे सभी संस्थान, अस्पताल, होटल या आवासीय परिसर जहां रोजाना 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता है, वे थोक अपशिष्ट उत्पादक की श्रेणी में आते हैं. इसके अलावा प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक पानी की खपत करने वाले या 20 हजार वर्ग मीटर से बड़े निर्मित क्षेत्र वाले परिसर भी इसी दायरे में शामिल हैं.
जानिए…थोक अपशिष्ट उत्पादकों की प्रमुख श्रेणियां
संस्थागत श्रेणी: सरकारी एवं निजी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय तथा अन्य शैक्षणिक एवं संस्थागत परिसर.
वाणिज्यिक श्रेणी: रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल, एयरपोर्ट, शॉपिंग मॉल, वाणिज्यिक परिसर, होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, छात्रावास, ऑडिटोरियम, एक्सपो हॉल, रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, मैरिज हॉल आदि.
आवासीय श्रेणी: रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, बड़े आवासीय समूह एवं अन्य आवासीय परिसर.
रजिस्ट्रेशन न कराने पर बंद होगी कचरा सेवा
नियमों का पालन न करने वाले और पोर्टल पर पंजीकरण से बचने वाले बड़े संस्थानों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. केंद्र सरकार के नियमों के उल्लंघन की स्थिति में इन डिफाल्टर प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाई जा सकती है. इसके अलावा, यदि कोई संस्थान लगातार चेतावनियों के बाद भी नियमों की अनदेखी करता है, तो नगर निगम द्वारा उनके परिसर से कचरा उठाने की सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा.
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