18 से दाखिल- खारिज के कार्य से अपने को अलग रखेंगे सीओ

बोधगया और नवादा के अकबरपुर के सीओ अविनाश कुमार एवं सुमित कुमार के निलंबन के विरोध में अंचलाधिकारियों का संघ उतर आया है.

बोधगया और अकबरपुर के सीओ के निलंबन से अंचलाधिकारियों का संघ खफाकाली पट्टी बांध प्रत्येक दिन दो मिनट का माैन से आरंभ करेंगे काम संवाददाता,पटना बोधगया और नवादा के अकबरपुर के सीओ अविनाश कुमार एवं सुमित कुमार के निलंबन के विरोध में अंचलाधिकारियों का संघ उतर आया है. संघ ने राजस्व एवं भूमि सुधर विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिख कर तत्काल दोनों सीओ के निलंबन वापस लेने की मांग की है. निलंबन वापसी होने तक सभी सीओ शुक्रवार से काली पट्टी बांध कर काम करेंगे और कार्यालय में आने से पहले दो मिनट का मौन व्रत धारण करेंगे. संघ ने कहा है कि निलंबन वापसी नहीं होने पर 18 जुलाई से राज्य के सभी सीओ दाखिल खारिज के कार्य से अपने को अलग कर लेंगे. संघ ने कहा कि दाखिल खरिज के लिए आवेदकों की ओर से दवाब बनाया जाता है. जबकि सभी अंचलों में भू माफिया सक्रिय हैं और सभी सीओ उनके निशाने पर हैं. सरकार की ओर से सीओ की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. सभी सीओ अपने सीमित संसाधनों केदम पर दाखिल खारिज के अलावा राजस्व्, निविदा, आपदा, विधि व्यवस्था, खनन पर रोक आदि जैसे कार्य कर रहे हैं. ऐसे में सीओ को निलंबित किये जाने से संघ के सदस्य अपमानित महसूस कर रहे हैं.सघ ने कहा कि कुछ अंचलों में न तो खतियान उपलब्ध है और न हीं महत्वपूर्ण दस्तावेज, जिससे कि सरकारी, सीलिंग और भूदान की जमीन चिन्हित किया जा सके. कुछ अंचलों में जमाबंदी केडेस्ट्रल सर्वे, रिविजनल सर्वे एवं चकबंदी के आधार पर किया जाता है. जमीन पर दखल सर्वे के आधार पर तथा जमीन की बिक्री चकबंदी खेसरे के आधार पर होती है.इस वैधानिक भूल भूलैया , अधूरे राजस्व अभिलेख और चौतरफा दवाब के बाद जब कोई सीओ दाखिल खारिज का निर्णय लेता है तो उसपर कार्रवाई कर दंडित किया जाता है. संघ ने कहा कि प्रावधानों में सीओ को जज के अधिकार दिये गये हैं. लेकिन, आज तक ऐसा कोई उदाहरण भी नहीं मिला.

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