बिहार के पशुपालकों का बढ़ेगा इनकम, सरकार ने दो साल के लिए बनाया प्लान

CM Nitish Gift: बिहार के पशुपालकों का इनकम बढ़ने वाला है. बिहार सरकार की तरफ से खास प्लानिंग की गई है. सीएम नीतीश कुमार ने एक्स के जरिए पोस्ट शेयर कर हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन करने का एलान किया, जिसका फायदा पशुपालकों को मिल सकेगा.

CM Nitish Gift: बिहार के पशुपालकों के लिए खुशखबरी है. बिहार में दूध की उपलब्धता में बढ़ोतरी और पशुपालकों का इनकम बढ़ने को लेकर सरकार ने खास प्लान तैयार किया है. सीएम नीतीश कुमार ने शनिवार को पोस्ट शेयर कर जानकारी दी. सीएम नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में लिखा, सात निश्चय-3 के तीसरे निश्चय ‘कृषि में प्रगति-प्रदेश में समृद्धि’ के तहत डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य के हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति के गठन का निर्णय लिया गया है.

पशुपालकों को मिल सकेगा उचित मूल्य

मुख्यमंत्री ने यह भी लिखा, दुग्ध उत्पादन समिति के गठन से पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य मिल सकेगा. राज्य के टोटल 39,073 गांवों में से 25,593 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन किया जा चुका है. बाकी के सभी गांवों में अगले दो सालों के अंदर दुग्ध उत्पादन समितियों के गठन का निर्देश पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को दिया गया है. इससे पशुपालकों का इनकम बढ़ेगा और राज्य में दूध की उपलब्धता में बढ़ोतरी होगी.

सभी पंचायतों में सुधा दूध बिक्री केंद्र खोलने का निर्णय

जानकारी के मुताबिक, सात निश्चय-2 के तहत राज्य के सभी प्रखंडों में सुधा दूध बिक्री केंद्रों की स्थापना की जा चुकी है. अब सात निश्चय-3 के तहत राज्य की सभी पंचायतों में भी सुधा दूध बिक्री केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. वर्तमान में राज्य की टोटल 8053 पंचायतों में से 100 पंचायतों में सुधा दूध बिक्री केंद्र स्थापित हो चुके हैं. अब बाकी के सभी 7953 पंचायतों में फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के अंत तक सुधा दूध बिक्री केंद्र खोलने का निर्देश दिया गया है.

राज्य की पंचायतों में खुलने वाले नए सुधा दूध बिक्री केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभ लेने वाली जीविका दीदियों को आवंटित करने का निर्देश दिया गया है. इससे राज्य के ग्रामीण इलाकों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा.

ग्रामीण इलाके के लोगों को होगा फायदा

राज्य में डेयरी व्यवसाय बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में अपने गांव में ही लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उनकी आमदनी बढ़ेगी. साथ ही लोगों के लिए दूध और दूध उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी. इससे ग्रामीण इकोनॉमी मजबूत हो सकेगी.

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Published by: Preeti Dayal

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