किलकारी में बच्चों ने दिखाई रचनात्मक उड़ान, सीखी एआइ से लेकर लोकनृत्य तक की बारीकियां

किलकारी बिहार बाल भवन में गुरुवार को बच्चों के लिए रचनात्मकता, सीख और उत्साह से भरपूर रहा. विभिन्न कलात्मक, बौद्धिक और शारीरिक गतिविधियों में बच्चों ने पूरे जोश से भाग लिया. मूर्तिकला सत्र में क्ले आर्टिस्ट ने बच्चों को हस्त मुद्राएं बनाना सिखाया, जिसमें 25 बच्चों ने भाग लिया.

संवाददाता, पटना किलकारी बिहार बाल भवन में गुरुवार को बच्चों के लिए रचनात्मकता, सीख और उत्साह से भरपूर रहा. विभिन्न कलात्मक, बौद्धिक और शारीरिक गतिविधियों में बच्चों ने पूरे जोश से भाग लिया. मूर्तिकला सत्र में क्ले आर्टिस्ट ने बच्चों को हस्त मुद्राएं बनाना सिखाया, जिसमें 25 बच्चों ने भाग लिया. कंप्यूटर प्रशिक्षण के पहले दिन एआइ और इंटरनेट की बेसिक जानकारी दी गई, जिसमें 30 बच्चे शामिल हुए. वहीं, लेखन कार्यशाला में लेखक तारिक असलम तस्नीम के साथ 20 बच्चों ने ‘लड़कियों को पढ़-लिख कर नौकरी करनी चाहिए या नहीं’ विषय पर वाद-विवाद और लघुकथा लेखन किया. नाट्यकला में संजय उपाध्याय ने ‘का लेके परदेश जाऊं’ लोकगीत का अभ्यास कराया.

नृत्य प्रशिक्षक देवव्रत बनर्जी ने उदय शंकर नृत्य शैली सिखाई, जबकि संगीत में ‘शुभमंगलम् जन्मदिनम्’ (संस्कृत) और ‘लिटिल प्रिटी बेबी’(अंग्रेजी) का अभ्यास हुआ. कराटे, ताइक्वांडो, बैडमिंटन, बॉल बैडमिंटन और चेस जैसी खेल गतिविधियों में भी बच्चों ने नई तकनीकें सीखी.

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