‘भोजपुरी हुक लाइन नहीं हटेगी’: जब एकता कपूर के आगे अड़ गए बिहार के कौशल किशोर; बोले- 70 म्यूजिशियंस के साथ पहली बार बना छठ गीत

बॉलीवुड गीतकार कौशल किशोर का नया छठ गीत ‘छठी मैया’ रिलीज होते ही इंटरनेट पर छा गया है. मात्र 35 घंटे में 10 मिलियन व्यूज पार कर इस गाने ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है. गीतकार ने गाने के पीछे की प्रेरणा, शूटिंग व भोजपुरी भाषा के महत्व पर खास बातचीत की है.

The Vvaan song Chhathi Maiya: बॉलीवुड फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ का छठ गीत ‘छठी मैया’ रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है. महज 35 घंटे में इस गाने ने 1 करोड़ से अधिक व्यूज हासिल कर रिकॉर्ड बना दिया है. गाने में एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया व एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा छठ की पवित्र रस्मों को निभाते दिख रहे हैं. इसमें शाम के अर्घ्य, सुबह की पूजा और कोसी भरने की खूबसूरत झलक दिखाई गई है.

इस गाने को बिहार के पूर्वी चंपारण (ढाका) के रहने वाले प्रसिद्ध गीतकार कौशल किशोर ने लिखा है. इस खास छठ गीत, इसकी भोजपुरी हुक-लाइन व शूटिंग के अनुभवों को लेकर कौशल किशोर से बातचीत हुई. पेश हैं इसके मुख्य अंश.

Q. फिल्म द वन के नए गीत छठी मैया की सफलता व इसके ग्रैंड प्रोडक्शन के बारे में बताइए?

- इस गीत ने रिलीज के महज 35 घंटों में ही 10 मिलियन ऑर्गेनिक व्यूज पार कर लिए हैं और सोशल मीडिया पर इस पर लाखों रील्स बन रहे हैं. मेरे मन में बचपन से सपना था कि जब भी मुझे कोई बड़ा मंच मिलेगा, मैं अपनी मिट्टी के पर्व को विश्व स्तर पर प्रस्तुत करूंगा. आमतौर पर छठ गीतों में पारंपरिक धुनें होती हैं, लेकिन हमने इसे इंटरनेशनल लेवल का म्यूजिक दिया है.

देश के 60 से 70 शीर्ष म्यूजिशियंस ने इसमें वाद्ययंत्र बजाए हैं. भारत के टॉप शहनाई वादक व परकशन आर्टिस्ट्स इसमें शामिल हैं. बड़े स्टूडियो में जब यह गूंजा, तो एक बिहारी होने के नाते मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया.

Q. छठ पूजा के साथ आपका व आपके परिवार का क्या भावनात्मक जुड़ाव रहा है?

- छठ शब्द सुनते ही मेरी आंखें नम हो जाती हैं. बिहार के लोगों के लिए छठ सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन की आत्मा है. मेरी दादी मां ने लगातार 55 साल और नानी मां ने 50 साल तक छठ का महाव्रत किया है. यानी मेरी दो पीढ़ियों ने मिलकर 105 वर्षों की निरंतर साधना की है. मेरी मां बीते 30 सालों से, बुआ 40 सालों से और अब मेरी बहनें यह व्रत कर रही हैं. यह गाना केवल मेरा लिखा हुआ नहीं है, बल्कि यह मेरी दादी और नानी के उसी 105 साल के तप और आशीर्वाद का परिणाम है, जिसे मैंने शब्दों में पिरो दिया है.

Q. बॉलीवुड की फिल्म होने के बावजूद गाने में भोजपुरी भाषा और मिठास को कैसे बरकरार रखा?

- जब निर्माता एकता कपूर व नीरज कोठारी के साथ बैठक हुई, तो फिल्म हिंदी होने के कारण वे चाहते थे कि पूरा गाना हिंदी में हो ताकि पूरे देश के दर्शक समझ सकें. मैंने उनकी बात का सम्मान किया, लेकिन शर्त रखी कि गाने का मुख्य हुक-लाइन भोजपुरी में ही रहेगा. वे इसके लिए तैयार हो गए. हमने हिंदी और भोजपुरी का ऐसा संतुलन बनाया है जो बिहार के घाटों की सोंधी महक को बनाए रखता है. इसमें खरना के प्रसाद व घाटों पर समाज के एक साथ आने की भावना को पूरी पवित्रता से दर्शाया गया है.

Q. गायक विशाल मिश्रा के साथ आपकी जुगलबंदी काफी चर्चित है, उनके साथ छठ गीतों पर काम करने का अनुभव कैसा रहा?

- विशाल भाई और मैं पिछले 15-17 सालों से सगे भाइयों की तरह साथ हैं. वे जितने प्रतिभाशाली कलाकार हैं, उतने ही जमीन से जुड़े इंसान हैं. वे बिहार व भोजपुरी संस्कृति को अपनी मिट्टी जितना ही प्यार और सम्मान देते हैं. इससे पहले भी हमने साथ मिलकर ‘छठी मैया बुलाए..’ किया था, जिसे खूब प्यार मिला. विशाल भाई के साथ हमारी ट्यूनिंग बहुत ही सहज और आध्यात्मिक स्तर पर जुड़ी हुई है.

Q. फिल्म बिहटा के वनदेवी मंदिर की मान्यताओं पर आधारित है, ऐसी अलौकिक थीम में भक्ति गीत लिखना कितना चुनौतीपूर्ण था?

- जहां भी कोई समस्या, डर या टॉक्सिसिटी होती है, वहां भक्ति कोई चुनौती नहीं बनती, बल्कि वही मुक्ति और शक्ति का मार्ग दिखाती है. भक्ति तो दीये की उस रोशनी की तरह है जो आते ही सारे अंधेरे को दूर कर देती है. इसलिए परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, भक्ति गीत लिखना मेरे लिए सबसे आसान, सुखद व मन को शांति देने वाला काम है. मैंने टॉक्सिक, हक जैसी कई फिल्मों के लिए भी लिखा है. लेकिन, भक्ति रचनाएं मेरी आत्मा की ऊर्जा हैं.

Q. अक्सर देखा जाता है कि गानों की सफलता के बीच लिरिसिस्ट का नाम पीछे छूट जाता है, इस पर आपका क्या रुख है?

- यह सच है कि अतीत में गीतकारों को वो हक और श्रेय नहीं मिला जिसके वे हकदार थे, क्योंकि उस समय इसके खिलाफ संगठित होकर आवाज नहीं उठाई गई. लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं. हमारे राज शेखर भैया (जो खुद बिहार से हैं) राइटर्स एसोसिएशन के जरिए लेखकों के अधिकारों के लिए बहुत मजबूती से काम कर रहे हैं. नए उभरते लेखकों को उनका पूरा क्रेडिट मिलना चाहिए.

Q. बिहार की संस्कृति और युवाओं के लिए आपकी आगे क्या योजनाएं हैं?

- बिहार का इतिहास व लोक-संस्कृति इतनी महान और विशाल है कि इस पर सैकड़ों फिल्में और गीत भी कम पड़ेंगे. अभी तक बॉलीवुड ने बिहार का केवल एक ही रूप देखा है, जबकि हमारी सांस्कृतिक विरासत बहुत समृद्ध है. मैं बिहार पर एक बहुत बड़ा और भव्य एंथम लिख रहा हूं, जो बहुत जल्द सभी के सामने आएगा. इसके साथ ही रामायण पर आधारित मेरे प्रोजेक्ट्स भी आ रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

हिमांशु देव सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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