सीबीएसइ : 10वीं के विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्रों को विषयवार भागों में बांटा गया

सीबीएसइ की ओर से बोर्ड परीक्षा के पहले शुक्रवार को लाइव वेबकास्ट आयोजित किया

-शिक्षक कंप्यूटर के माध्यम से करेंगे मूल्यांकन

-डिजिटल मूल्यांकन लागू होने के बाद पोस्ट-एग्जाम मार्क्स वेरिफिकेशन की प्रक्रिया खत्म

संवाददाता, पटना

सीबीएसइ की ओर से बोर्ड परीक्षा के पहले शुक्रवार को लाइव वेबकास्ट आयोजित किया. इसमें स्कूलों, शिक्षकों और परीक्षा अधिकारियों को बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी और नये बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी. 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को पारदर्शी, व्यवस्थित और निष्पक्ष आयोजन के बारे में बताया गया. वेबिनार में सीबीएसइ ने परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए तीन प्रमुख बदलाव की जानकारी दी है. पहला, कक्षा 10वीं के छात्रों को दूसरी बोर्ड परीक्षा का मौका दिया जायेगा, जिससे वे अपने प्रदर्शन में सुधार कर सकें. दूसरा, 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अब डिजिटल ऑनस्क्रीन मार्किंग सिस्टम से होगा. तीसरा, 10वीं के विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्रों को विषयवार भागों में बांटा गया है. बोर्ड के अनुसार इन बदलावों का उद्देश्य मूल्यांकन में गलतियों को कम करना, विषय-विशेष आकलन को बेहतर बनाना और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को अधिक छात्र-अनुकूल बनाना है.

10वीं के विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्रों की संरचना में बदलाव

10वीं के छात्रों के लिए विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्रों की संरचना में बदलाव किया गया है. विज्ञान में अब फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के अलग-अलग सेक्शन होंगे. सामाजिक विज्ञान में इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र को अलग भागों में बांटा गया है. छात्रों को हर विषय सेक्शन अलग-अलग हल करना होगा और संबंधित विषय के शिक्षक ही कॉपी जांचेंगे. सीबीएसइ का कहना है कि इससे विषय-विशेष मूल्यांकन बेहतर होगा और प्रत्येक विषय को उचित महत्व मिलेगा.

ईमानदारी से परीक्षा दें छात्र : राहुल सिंह

वेबिनार की अध्यक्षता परीक्षा नियंत्रक डॉ संयम भारद्वाज ने की, मुख्य संबोधन सीबीएसइ के अध्यक्ष राहुल सिंह ने दिया. राहुल सिंह ने कहा है कि अभिभावक नियमों को समझें और बच्चों को ईमानदारी से परीक्षा देने के लिए प्रेरित करें. बोर्ड ने साफ किया कि गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी, जिसमें कानूनी कदम भी शामिल हो सकते हैं.

करीब 46 लाख छात्र देंगे बोर्ड परीक्षा

31 हजार से ज्यादा स्कूलों और 26 देशों में फैले केंद्रों से करीब 46 लाख छात्र परीक्षा देंगे. दुनिया भर में आठ हजार से अधिक परीक्षा केंद्र बनाये गये हैं. 10वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होकर 11 मार्च तक चलेंगी. वहीं, 12वीं की परीक्षाएं भी 17 फरवरी से शुरू होकर 10 अप्रैल तक चलेंगी. केवल 12वीं में ही करीब 18.6 लाख छात्र शामिल होंगे और 10 करोड़ से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जायेगा.

12वीं के लिए ऑनस्क्रीन मार्किंग के तहत उत्तर

पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल तरीके से जांचा जायेगा. प्रशिक्षित शिक्षक कंप्यूटर के माध्यम से मूल्यांकन करेंगे, जिससे जोड़-घटाव या पोस्टिंग जैसी मानवीय गलतियों की संभावना कम हो जायेगी. सीबीएसइ ने बताया कि मूल्यांकन शुरू होने से पहले शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा. डिजिटल मूल्यांकन लागू होने के बाद पोस्ट-एग्जाम मार्क्स वेरिफिकेशन की प्रक्रिया खत्म कर दी गयी है, क्योंकि सिस्टम पहले से ही सटीक गणना सुनिश्चित करता है. हालांकि छात्र री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकेंगे.

डिजिटल मूल्यांकन से 12 दिनों से घटकर करीब नौ दिनों तक होगा मूल्यांकन

वेबिनार में बोर्ड ने डिजिटल मूल्यांकन के कई फायदे बताये. स्वचालित सिस्टम से अंक जोड़ने और अपलोड करने में होने वाली गलतियां खत्म होंगी. शिक्षक अपने ही स्कूल से कॉपियां जांच सकेंगे, जिससे यात्रा कम होगी और मूल्यांकन प्रक्रिया तेज होगी. मूल्यांकन का समय 12 दिनों से घटकर करीब नौ दिन रह सकता है, जिससे रिजल्ट जल्दी घोषित करना संभव होगा.

स्कूलों और शिक्षकों के लिए सख्त निर्देश

सीबीएसइ ने स्कूलों को साफ चेतावनी दी है कि अगर वे परीक्षा ड्यूटी या मूल्यांकन के लिए शिक्षकों को समय पर नहीं भेजते हैं, तो बोर्ड उस स्कूल का परिणाम रोक सकता है. बोर्ड ने कहा कि परीक्षाओं के सफल आयोजन के लिए स्कूलों का सहयोग जरूरी है. सीबीएसइ ने सभी स्कूलों से कहा है कि वे परीक्षा से जुड़े अपने सवाल 14 फरवरी दिन शाम पांच बजे तक info.cbseexam@cbseshiksha.in पर भेज दें. बोर्ड इन सवालों के आधार पर एक एफएक्यू सूची तैयार करेगा और सभी संबद्ध स्कूलों को भेजेगा, ताकि परीक्षा के दौरान किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने.

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Published by: Anurag pradhan

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