पटना से सविता की रिपोर्ट
पटना. नौबतपुर के चेसी निवासी 58 वर्षीय कैप्टन मनीष ने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ आधुनिक तकनीक से मछली पालन कर सफलता की नई मिसाल पेश की है. वह पिछले एक वर्ष से एक्सपोर्ट क्वालिटी की स्नेक हेड (Snakehead) मछली का पालन कर रहे हैं. मात्र 10 सीमेंट टैंक में मछली पालन कर उन्होंने एक साल में 50 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है. उनकी सफलता से प्रेरित होकर बिहार के छह अन्य लोग भी स्नेक हेड मछली पालन से जुड़ चुके हैं.
स्नेक हेड मछली की है विदेशों में बड़ी मांग
कैप्टन मनीष बताते हैं कि स्नेक हेड मछली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रोसेसिंग के बाद इसे एक वर्ष तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इसी वजह से इसकी विदेशी बाजारों में अच्छी मांग है. उन्होंने अब तक 45 मीट्रिक टन स्नेक हेड मछली का निर्यात ओडिशा और चेन्नई के माध्यम से किया है.
परिवार के लिए छोड़ी नौकरी, अपनाया नया रास्ता
कैप्टन मनीष ने बताया कि मर्चेंट नेवी की नौकरी के दौरान उन्हें छह-छह महीने तक घर से दूर रहना पड़ता था. बढ़ती उम्र के साथ परिवार से दूरी उन्हें अखरने लगी. समुद्री जीवन और मछली व्यापार का अनुभव होने के कारण उन्होंने मछली पालन को अपना नया करियर बनाने का फैसला किया. जानकारी जुटाने पर पता चला कि बिहार में स्नेक हेड मछली का व्यावसायिक पालन लगभग नहीं हो रहा है. इसके बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर इस क्षेत्र में कदम रखा.
RAS तकनीक से शुरू किया हाईटेक फिश फार्म
करीब डेढ़ वर्ष पहले नौबतपुर लौटकर उन्होंने 5,000 वर्ग फीट क्षेत्र में 10 सीमेंट टैंक तैयार किए और Recirculating Aquaculture System (RAS) तकनीक से मछली पालन शुरू किया. स्नेक हेड मछली का जीरा (फिंगरलिंग) उन्होंने आंध्र प्रदेश से मंगाया और पूरी पूंजी इस परियोजना में निवेश कर दी. आधुनिक तकनीक के कारण कम जगह में अधिक उत्पादन संभव हुआ.
अब बिहार में लगाएंगे प्रोसेसिंग यूनिट
कैप्टन मनीष का कहना है कि मछली पालन से उन्हें मर्चेंट नेवी की नौकरी के बराबर आय होने लगी है. सबसे बड़ी खुशी यह है कि अब वह परिवार के साथ रहकर काम कर पा रहे हैं. उन्होंने बताया कि जल्द ही बिहार में स्नेक हेड मछली की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना है. इससे राज्य के लोगों को रेडी-टू-ईट स्नेक हेड मछली उपलब्ध होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
