बुद्ध संग्रहालय के उद्घाटन में शामिल होंगे 15 देशों के बौद्ध भिक्षु

भगवान बुद्ध की पावन धरती वैशाली में भगवान बुद्ध के स्मृति अवशेषों को सुरक्षित रखने और बौद्ध धर्मावलंबियों के दर्शन के लिए बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का निर्माण किया गया है.

संवाददाता, पटना भगवान बुद्ध की पावन धरती वैशाली में भगवान बुद्ध के स्मृति अवशेषों को सुरक्षित रखने और बौद्ध धर्मावलंबियों के दर्शन के लिए बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का निर्माण किया गया है. जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में इसका उद्घाटन किया जायेगा. उद्घाटन से संबंधित सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं. नवनिर्मित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप के उद्घाटन समारोह में 15 देशों के बौद्ध भिक्षु शामिल होंगे. इसमें चीन, जापान, श्रीलंका, कंबोडिया, मंगोलिया, मलेशिया, भूटान, थाइलैंड, बर्मा, लाओस, बंग्लादेश, इंडोनेशिया, तिब्बत, नेपाल और वियतनाम से बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे. यह स्मृति स्तूप बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए एक पवित्र तीर्थस्थल के साथ ही पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र भी बनेगा. यह स्थल स्थानीय रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा और बिहार के पर्यटन विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगा. वैशाली में पवित्र पुष्करणी तालाब एवं पौराणिक मड स्तूप के निकट 550.48 करोड़ रुपये की लागत से 72 एकड़ के भूखंड पर बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप का निर्माण किया गया है. वर्ष 1958-62 के दौरान राजा विशाल के गढ़ की खुदाई में भगवान बुद्ध का अस्थि कलश मिला है, जिसे प्रथम तल पर स्थापित किया जायेगा. स्मृति स्तूप पूरी तरह पत्थरों से निर्मित है और स्तूप में 42373 बलुआ पत्थर लगाये गये हैं. राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से विशेष रूप से इन पत्थरों काे मंगवाया गया है और टंग एवं ग्रूव तकनीक से पत्थरों को लगाया गया है. भूकंप-रोधक क्षमता को ध्यान में रखते हुए स्मृति स्तूप को भूकंपरोधी बनाने में कई मॉडर्न तकनीकों का उपयोग किया गया है.

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By RAKESH RANJAN

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