बुद्ध का संदेश विश्व में धारण करने योग्य

बुद्ध का संदेश पूरे विश्व में धारण करने योग्य है.

संवाददाता, पटना बुद्ध का संदेश पूरे विश्व में धारण करने योग्य है. यह बात बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर कला संस्कृति एवं युवा विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी के दौरान बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने संग्रहालय परिसर में कही. वहीं कला संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने कहा कि भगवान बुद्ध का इतिहास प्राचीन भारत का इतिहास रहा है. जब वैदिक कर्मकांड जटिल हो रहा था उसी समय बुद्ध का अवतरण पृथ्वी पर होता है. बुद्ध का दिया गया मध्यम मार्ग का ज्ञान आज भी उतना ही व्यावहारिक है जितना कालांतर में कभी रहा होगा. संगोष्ठी के दौरान काशी हिंदू विवि के प्रो. डॉ सीताराम दुबे ने शिक्षा के क्षेत्र में बौद्ध धर्म का योगदान पर कहा कि बुद्ध, धर्म और संघ बौद्ध धर्म के त्रिपिटक है. बुद्ध ने अपने प्राप्त ज्ञान से संसार के दुख को दूर करने की कोशिश की. कोलकाता के प्रो डॉ रूपेंद्र कुमार चटोपाध्याय ने कहा कि बुद्ध ने अपने सिद्धांत को आम लोगों तक पहुंचाया. इस धर्म के विस्तार में बौद्ध भिक्षुओं का काफी योगदान रहा. बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है. काशी हिंदू विवि के सहायक प्रो. डा. अरुण कुमार यादव ने कहा कि बौद्ध धर्म काफी गहराई और समग्रता वाला धर्म है. कार्यक्रम के दौरान प्रो. सीताराम दुबे, कला संस्कृति विभाग की विशेष कार्य अधिकारी कहकशां, डॉ हर्ष रंजन, रचना पाटिल समेत अन्य लोग मौजूद रहे.

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