किसान पिता के संघर्षों का परिणाम, बेटा SDO बन पहली बार पहुंचा घर, ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से किया भव्य स्वागत

BPSC Success Story : पटना जिले के दुल्हिन बाजार प्रखंड के पिरही गांव निवासी BPSC में चयनित SDO सुमित कुमार का पैतृक गांव लौटने पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया. सुमित ने अपनी सफलता का श्रेय किसान पिता के संघर्ष और परिवार के सहयोग को दिया.

पटना (दुल्हिन बाजार) से वेद प्रकाश की रिपोर्ट
BPSC Success Story : BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर SDO पद के लिए चयनित सुमित कुमार के पहली बार अपने पैतृक गांव पिरही पहुंचने पर ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया. पूरे गांव में खुशी का माहौल रहा और लोगों ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया.

दुल्हिन बाजार से गांव तक हुआ स्वागत

प्रखंड क्षेत्र के पिरही गांव निवासी किसान उमाशंकर प्रसाद के पुत्र सुमित कुमार के एसडीओ पद पर चयन की सूचना मिलते ही ग्रामीणों में उत्साह का माहौल था. रविवार को गांव लौटने पर दुल्हिन बाजार में लोगों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया. इसके बाद पैतृक गांव पहुंचने पर भी ग्रामीणों ने स्वागत समारोह आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया.

सफलता का श्रेय पिता के संघर्ष को दिया

इस अवसर पर सुमित कुमार ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दृढ़ निश्चय कर ले तो उसके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता को देते हुए कहा कि उनके पिता एक किसान हैं, लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम कर उनकी हर आवश्यकता पूरी की. उनकी सफलता में सबसे बड़ा योगदान उनके पिता का है.

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं शुभचिंतक मौजूद रहे. सभी ने सुमित कुमार को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

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By Nikhil Anurag

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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