VIDEO : बिहार में शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग के नए नियमों में गड़बड़ी और खामियां, क्या कोर्ट जाएगा मामला?

बिहार में शिक्षकों की नई ट्रांसफर-पोस्टिंग नियमावली में कई गंभीर खामियां सामने आ रही हैं, जिस पर शिक्षक संगठन कड़ी आपत्ति जता रहे हैं. पुराने शिक्षकों को सरप्लस मानने और एकल विषय शिक्षकों को नोटिस भेजने जैसी समस्याओं ने तूल पकड़ लिया है. इस मुद्दे पर विशेष बातचीत और सरकार की मांगों पर विस्तृत जानकारी.

Bihar Teacher Transfer Posting : बिहार में शिक्षकों की नई ट्रांसफर-पोस्टिंग नीति में कई खामियां हैं. शिक्षक संगठन इस पर आपत्ति जता रहे हैं. इसी मुद्दे पर प्रभात खबर के रिपोर्टर राज कमल ने सीपीआई के एमएलसी संजय कुमार सिंह से खास बातचीत की है. पूरा इंटरव्यू वीडियो में देखें...

शिक्षकों की क्या है आपत्ति

  • पुराने शिक्षकों को सरप्लस मानने पर आपत्ति (Surplus Teacher) : एमएलसी संजय कुमार सिंह का कहना है कि जो वरिष्ठ शिक्षक 10-15 वर्षों से स्वीकृत पदों पर पढ़ा रहे हैं, उन्हें अधिकारियों की गलतियों के कारण 'सरप्लस' (नियुक्ति से ज़्यादा या अनावश्यक रूप से हटाए जा रहे) मानकर हटाया जा रहा है, जबकि बाद में आए शिक्षकों को वहीं रखा जा रहा है.
  • एकल विषय शिक्षकों को नोटिस : नए ऐप से आवेदन प्रक्रिया में, जिन विषयों (जैसे मनोविज्ञान, उर्दू, संस्कृत आदि) में सिर्फ एक शिक्षक हैं, उन्हें भी 'सरप्लस' होने का नोटिस भेजा जा रहा है.
  • शैक्षणिक व्यवस्था पर असर : अनुभवहीन या नए शिक्षकों के भरोसे व्यवस्था छोड़ने और अनुभवी शिक्षकों को अस्त-व्यस्त करने से बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है. शिक्षकों की इस अनिश्चितता का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ेगा.
  • विशेष वर्गों और पुस्तकालयाध्यक्षों की अनदेखी : असाध्य रोग से पीड़ित, दिव्यांग तथा महिला शिक्षिकाओं (पति-पत्नी स्थानांतरण) को प्राथमिकता देने के स्पष्ट नियमों का अभाव है. साथ ही राज्य के पुस्तकालयाध्यक्षों (Librarians) और दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों के स्थानांतरण का नियमावली में कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

सरकार से मांग और कोर्ट जाने की चेतावनी

संजय कुमार सिंह के अनुसार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को 4 पन्नों का ज्ञापन देकर स्थानांतरण प्रक्रिया को तत्काल स्थगित करने और पुनर्विचार करने की मांग की गई है. यदि विभाग और सरकार त्रुटियों में सुधार नहीं करती है, तो शिक्षक संगठनों को आंदोलन करने और न्यायालय का रुख करने की सलाह दी गई है.

शिक्षकों की इन चिंताओं के बीच, विभाग ने अपनी तरफ से स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए कुछ नियम जारी किए हैं, जिनके बारे में हम आगे जानेंगे.

अब जानिए, अभी क्या है प्रक्रिया

शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन को लेकर शिक्षा विभाग ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं. इसके तहत शिक्षकों से ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन मांगे जा रहे हैं. पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए कंप्यूटर द्वारा अपने आप विभागों का बंटवारा या ऑनलाइन तरीके से रैंडम चयन का सहारा लिया जा रहा है. शिक्षकों के पदस्थापन के लिए विभाग ने निम्नलिखित मुख्य बिंदु तय किए हैं :

  • महिला शिक्षिकाएं : महिला शिक्षकों को राहत देते हुए उनके गृह जिला या उनके वर्तमान निवास के नजदीकी पंचायत में पदस्थापित करने का प्रावधान किया गया है.
  • पुरुष शिक्षक : पुरुष शिक्षकों को उनके वर्तमान पदस्थापन के नजदीकी या बगल के प्रखंड (Block) में विकल्प देने की व्यवस्था की गई है.
  • दिव्यांग एवं गंभीर बीमार : दिव्यांग शिक्षकों तथा असाध्य रोगों से ग्रस्त शिक्षकों को प्राथमिकता के आधार पर उनकी पसंद का विद्यालय या नजदीकी क्षेत्र आवंटित किया जाएगा.
  • पति-पत्नी मामला : यदि पति और पत्नी दोनों शिक्षक हैं या सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें एक ही प्रखंड या आसपास के क्षेत्र में पदस्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है.
  • जिला कैडर व्यवस्था : शिक्षकों को अब पूरी तरह से जिला कैडर के तहत व्यवस्थित किया जा रहा है, ताकि प्रशासनिक नियंत्रण और सेवा शर्तो का बेहतर प्रबंधन हो सके.

क्या है आवेदन की प्रक्रिया

  • ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन : शिक्षकों को विभाग द्वारा जारी ई-शिक्षाकोष पोर्टल (E Shikshakosh Portal) या संबंधित ऐप के माध्यम से लॉगिन कर आवेदन जमा करना होता है.
  • विकल्प चुनना : शिक्षकों को अपने गृह पंचायत, नजदीकी प्रखंड या पसंदीदा विद्यालयों के 5 से 10 विकल्प भरने की छूट दी गई है.
  • सत्यापन और रैंडमाइजेशन : डीईओ (DEO) स्तर से डेटा सत्यापन के बाद सॉफ्टवेयर के जरिए पारदर्शी तरीके से स्कूलों का आवंटन किया जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By अंजनी पांडेय

अंजनी पांडेय 10 से अधिक वर्षों से हिंदी डिजिटल मीडिया में सक्रिय. बिहार के स्थानीय-क्षेत्रीय मुद्दों से लेकर राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी खबरों के संपादन-प्रकाशन के साथ ही न्यूज़रूम ऑपरेशन्स, सोशल मीडिया कम्यूनिकेशन और पब्लिक मैसेजिंग का भी व्यावहारिक अनुभव. कंटेंट डेवलपमेंट, ब्रेकिंग न्यूज मैनेजमेंट और ऑडियंस इंगेजमेंट में विशेषज्ञता. गूगल-रॉयटर्स से डिजिटल जर्नलिज्म और AI से जुड़े विषयों पर प्रमाणिकता हासिल की है.

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