Rajya Sabha Election: बिहार में अप्रैल में राज्यसभा की 5 सीटें खाली हो रही हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के अंदर इसे लेकर भारी मंथन चल रहा है. जेडीयू के पास फिलहाल 2 सीटें जीतने का नंबर है. अभी इन सीटों पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर काबिज हैं. इस बिच चर्चा है कि नीतीश कुमार इस बार किसी एक को ही दोबारा मौका देंगे.
रामनाथ ठाकुर का पलड़ा क्यों भारी
नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा अति पिछड़ा वोट बैंक के इर्द-गिर्द रही है. रामनाथ ठाकुर न सिर्फ भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के बेटे हैं, बल्कि वे समाजवाद का बड़ा चेहरा भी हैं. जेडीयू में आम तौर पर किसी को तीसरी बार राज्यसभा नहीं भेजा जाता. आरसीपी सिंह और वशिष्ठ नारायण सिंह को भी पार्टी ने तीसरी बार राज्यसभा में नहीं भेजा. लेकिन रामनाथ ठाकुर के मामले में नीतीश इस नियम को बदल सकते हैं.
हरिवंश सिंह के लिए मुश्किलें क्यों
हरिवंश सिंह पिछले 7 सालों से राज्यसभा के उपसभापति हैं. लेकिन उनके और नीतीश के रिश्तों में तब कड़वाहट की खबर तब आई थी जब 2022 में नीतीश ने एनडीए छोड़ा था. हरिवंश ने उस समय उपसभापति का पद नहीं छोड़ा. जेडीयू के कई नेता उन्हें पार्टी से ज्यादा भाजपा का वफादार मानते हैं. ऐसे में उनकी तीसरी पारी पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं.
नीतीश के नए भरोसेमंद कौन
जेडीयू की दूसरी सीट के लिए मनीष वर्मा का नाम सबसे ऊपर है. पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा उसी कुर्मी समाज से आते हैं. वे फिलहाल पार्टी का जमीनी काम देख रहे हैं और उन्हें नीतीश का उत्तराधिकारी तक माना जा रहा है. चर्चा यह भी है कि संजय झा को उपसभापति बनाया जा सकता है और मनीष वर्मा को संसद भेजा जा सकता है.
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क्या है बिहार का चुनावी गणित
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के वोट चाहिए. एनडीए में भाजपा, जेडीयू और सहयोगियों के पास कुल 202 विधायक हैं. इस हिसाब से वे आसानी से 4 सीटें जीत सकते हैं. पांचवीं सीट के लिए उन्हें सिर्फ 3 और वोटों की जरूरत होगी, जो विपक्षी खेमे में सेंधमारी से मिल सकते हैं.
महागतबंधन में राजद और कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं. उन्हें एक भी सीट जीतने के लिए कम से कम 6 और वोट चाहिए. यहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के 5 विधायक किंगमेकर की भूमिका में है. ओवैसी ने अपना उम्मीदवार उतारने का संकेत देकर लालू-तेजस्वी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.
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