Bihar Politics: Tejashwi Returns से सियासी हलचल तेज, भाजपा नेता ने कहा- 9वीं फेल क्या कर लेंगे?

Bihar Politics: खरमास की विदाई के साथ ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अब सीधे एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं और आज होने वाली आरजेडी विधायकों की बैठक को 2026 की राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव माना जा रहा है.

By Pratyush Prashant | January 16, 2026 1:28 PM

Bihar Politics: खरमास समाप्त होते ही बिहार की राजनीति एक बार फिर रफ्तार पकड़ती दिख रही है. इसी कड़ी में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज अपने सरकारी आवास पर राष्ट्रीय जनता दल के सभी विधायकों, सांसदों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक बुलाई है.

दोपहर दो बजे शुरू होने वाली इस बैठक में बिहार विधानमंडल के आगामी बजट सत्र की रणनीति से लेकर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की राजनीति तक पर व्यापक चर्चा होगी. विधानसभा चुनाव में हार और विदेश यात्रा से लौटने के बाद यह तेजस्वी यादव की पहली बड़ी राजनीतिक बैठक मानी जा रही है, जिससे इसके राजनीतिक मायने और भी बढ़ जाते हैं.

बजट सत्र के लिए विपक्ष की रणनीति तय होगी

बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा 2 फरवरी से शुरू होने वाले बिहार विधानमंडल के बजट सत्र को लेकर होगा. सदन में सरकार को किन मुद्दों पर घेरना है, किन सवालों को प्रमुखता से उठाना है और विपक्ष की भूमिका को किस तरह आक्रामक और प्रभावी बनाया जाए, इस पर तेजस्वी यादव विधायकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश देंगे. बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे विपक्ष के प्रमुख हथियार बन सकते हैं.

इस बैठक में हालिया विधानसभा चुनाव में मिली हार की भी गहन समीक्षा की जाएगी. पार्टी संगठन की कमजोरियां, रणनीतिक चूक और चुनावी प्रबंधन में रह गई कमियों पर खुलकर चर्चा होने की संभावना है. माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव पार्टी नेताओं से फीडबैक लेकर संगठन में जरूरी बदलावों की रूपरेखा तैयार करेंगे, ताकि आने वाले चुनावों में आरजेडी को नए सिरे से मजबूत किया जा सके.

बिहार यात्रा से पहले विधायकों से फीडबैक

तेजस्वी यादव जल्द ही राज्यव्यापी बिहार यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं. इस बैठक में वे विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी स्थिति, जनता की नाराजगी और अपेक्षाओं को लेकर जानकारी लेंगे. इसी आधार पर बिहार यात्रा का एजेंडा और राजनीतिक नैरेटिव तय किया जाएगा, जिससे पार्टी दोबारा जनता के बीच मजबूती से अपनी मौजूदगी दर्ज करा सके.

विधानसभा चुनाव में करारी हार और विदेश यात्रा से लौटने के बाद यह तेजस्वी यादव की पहली बड़ी राजनीतिक सक्रियता मानी जा रही है. यही वजह है कि इस बैठक को आरजेडी के लिए ‘री-लॉन्च मोमेंट’ के तौर पर देखा जा रहा है. बैठक में सांसदों और पार्टी के बड़े नेताओं की मौजूदगी यह संकेत देती है कि संगठन और नेतृत्व अब एकजुट होकर आगे की रणनीति तैयार करना चाहता है.

तेजस्वी की बैठक पर BJP का तीखा तंज

प्रभात खबर के रिपोर्टर से बात करते हुए भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक नेता कहा- भाजपा नेताओं ने कहा कि सिर्फ बैठक बुला लेने से राजनीति नहीं चलती, उसके लिए सोच, समझ और नेतृत्व क्षमता भी चाहिए. भाजपा का कहना है कि तेजस्वी यादव को पहले अपने घर और पार्टी के अंदर की स्थिति संभालनी चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “बैठक करके क्या कर लेंगे, पहले घर में बैठक कर लें. रणनीति बनाने के लिए बुद्धि भी होनी चाहिए. 9वीं फेल क्या कर लेगा.” इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है.

भाजपा नेताओं का आरोप है कि तेजस्वी सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसी बैठकों का आयोजन कर रहे हैं, जबकि उनके पास कोई ठोस विजन या रोडमैप नहीं है. उनका कहना है कि राजद के भीतर खुद नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति है और पार्टी हार से उबर नहीं पाई है.

विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव इस बैठक के जरिए विपक्ष को एकजुट और धारदार बनाने का संदेश देना चाहते हैं. बजट सत्र में सरकार को घेरने से लेकर सड़क पर आंदोलन तक, आरजेडी की भूमिका ज्यादा आक्रामक और संगठित हो सकती है. यह बैठक न सिर्फ सदन की रणनीति तय करेगी, बल्कि बिहार की आने वाली राजनीति की दिशा भी संकेतों में तय कर देगी.

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