फेक एक्सपीरियंस लेटर देकर बना था असिस्टेंट प्रोफेसर, BSUSC ने रद्द किया चयन, FIR का आदेश

Bihar News: फर्जी शिक्षण अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर बने अभ्यर्थी पर बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है. आयोग ने चयन रद्द करने के साथ संबंधित विश्वविद्यालय को एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है.

Bihar News: (अनुराग प्रधान) बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा फैसला लेते हुए समाजशास्त्र विषय के एक चयनित अभ्यर्थी का चयन रद्द कर दिया है. आयोग ने अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत फर्जी शिक्षण अनुभव प्रमाण पत्र को गंभीर अनियमितता मानते हुए संबंधित विश्वविद्यालय को प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश भी दिया है.

समाजशास्त्र विषय में हुआ था चयन

आयोग की ओर से जारी सूचना के अनुसार, समाजशास्त्र विषय के लिए विज्ञापन संख्या AP-SOCI-17/20-21 के तहत मनोज कुमार (UID No.- MAN11051980SOC0067627) का चयन पिछड़ा वर्ग (BC) श्रेणी में हुआ था. चयन सूची में उनका नाम क्रम संख्या-09 पर शामिल था.

विश्वविद्यालय की जांच में खुला फर्जीवाड़ा

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा के कुलसचिव द्वारा आयोग को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया कि मनोज कुमार द्वारा प्रस्तुत शिक्षण अनुभव प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया. इसके बाद विश्वविद्यालय ने उनकी नियुक्ति और पदस्थापन को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया. साथ ही नियुक्ति पत्र जारी होने की तिथि से ही उनकी सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया.

आयोग ने रद्द की नियुक्ति की अनुशंसा

विश्वविद्यालय की रिपोर्ट मिलने के बाद बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने भी अभ्यर्थी का चयन रद्द कर दिया है. आयोग ने स्पष्ट किया कि चयन सूची में दर्ज अभ्यर्थी की नियुक्ति संबंधी अनुशंसा अब प्रभावहीन मानी जाएगी.

एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश

आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित विश्वविद्यालय को अभ्यर्थी के खिलाफ सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 10 जनवरी 2025 और 13 जनवरी 2025 को प्रकाशित चयन एवं आवंटन सूची में दर्ज उक्त अभ्यर्थी का चयन अब मान्य नहीं रहेगा.

नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर

बीएसयूएससी की इस कार्रवाई को नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और फर्जी दस्तावेजों पर सख्ती के रूप में देखा जा रहा है. आयोग के इस कदम से यह संदेश गया है कि गलत दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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Published by: Abhinandan Pandey

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