विदेशी कलाओं की प्रदर्शनी से सजेगा बिहार संग्रहालय

बिहार संग्रहालय के स्थापना दिवस के अवसर पर हर साल 7 अगस्त को म्यूजियम बिनाले का आयोजन किया जाता है. यह आयोजन इस बार 31 दिसंबर तक आयोजित किया जायेगा. तीन जून को संग्रहालय और ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्य दूतावास, कोलकाता के संयुक्त सहयोग में ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी कलाकृतियों की एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया.

– 31 दिसंबर तक चलेगा बिहार संग्रहालय का बिनाले लाइफ रिपोर्टर@पटना राजधानी के बिहार संग्रहालय में हर साल सात अगस्त को म्यूजियम बिनाले का आयोजन किया जाता है. इस बार का बिनाले विशेष रूप से भव्य और विविधतापूर्ण होगा. यह आयोजन 31 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें कला प्रेमियों को अद्वितीय अनुभव मिलेगा. इस वर्ष के बिनाले का उद्घाटन तीन जून को ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी कलाकृतियों की प्रदर्शनी से हुआ, जो संग्रहालय और ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्य दूतावास के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया था. इस प्रदर्शनी को ”कर्टन रेजर” के रूप में बिहार संग्रहालय द्विवार्षिकी के प्रारंभिक कार्यक्रम के रूप में देखा गया. …………….. विश्व भर के कलाकारों की होगी भागीदारी इस बार बिनाले में श्रीलंका, मैक्सिको, इंडोनेशिया, इथोपिया और आइजीएनजीए जैसे देशों के कलाकार हिस्सा लेंगे. प्रदर्शनी में पेंटिंग, मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, फोटोग्राफ और इंस्टॉलेशन जैसी विविध कलाएं प्रदर्शित की जायेंगी. इसके अलावा, छह अगस्त को हैरिटेज वॉक का आयोजन होगा, जबकि 8-10 अगस्त को आर्ट और कल्चर पर आधारित सेमिनार और फिल्म स्क्रिनिंग का आयोजन होगा. ……………. आकर्षण का केंद्र होंगी प्रदर्शनी सितंबर और अक्तूबर में मेहरानगढ़ और अर्जेंटिना की प्रदर्शनी के साथ-साथ पटना कलम शैली और अन्य भारतीय कला रूपों को भी प्रदर्शित किया जायेगा. इसके साथ-साथ भारतीय प्रवासियों के कलाकारों द्वारा क्यूरेट की गयी प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र होंगी. इन प्रदर्शनों को विभिन्न देशों के विशेषज्ञों के सहयोग से प्रस्तुत किया जायेगा. संग्रहालय में एक विशेष प्रदर्शनी भारत और चीन की सांस्कृतिक समानताओं पर आधारित होगी, जबकि स्विटजरलैंड की लुसेन यूनिवर्सिटी लैब इंटरएक्टिव इंस्टॉलेशन के माध्यम से बिहार संग्रहालय की महत्वपूर्ण मूर्तियों को प्रदर्शित करेगी. …………….. सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की दिखेगी झलक इस आयोजन में कला, संस्कृति, संगीत और वैश्विक दक्षिण की विरासत पर सेमिनार आयोजित किए जायेंगे. इन सेमिनारों का संयोजन और संचालन डॉ अलका पांडे करेंगी, जिनके द्वारा एक पुस्तक के रूप में कार्यवाही संपादित की जायेगी. साथ ही, विभिन्न देशों के सांस्कृतिक समूहों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें प्रसिद्ध भारतीय कलाकार अपनी कला के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे.

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