Bihar Land Survey: बिहार में चल रहे भूमि सर्वेक्षण के बीच पता चला है कि 9 हजार से अधिक गांवों का कैडेस्टल सर्वे वाला खतियान या तो सरकारी रिकॉर्ड रूम से गायब है या फिर पूरी तरह फट चुका है. इस समस्या से निपटने और जमीन सर्वे को समय पर पूरा करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अब रैयतों से सहयोग की अपील की है. विभाग का कहना है कि जिला राजस्व अभिलेखागारों में यह बेहद जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण जमीन के मालिकाना हक को तय करने में दिक्कत आ रही है.
कुछ समय के लिए दें अपना खतियान, सुरक्षित लौटेगी कॉपी- विभाग
राजस्व विभाग ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा है कि अगर किसी भी परिवार के पास अपने गांव या जमीन का कैडेस्टल सर्वे खतियान सुरक्षित उपलब्ध है, तो उसे कुछ समय के लिए अपने अंचल कार्यालय या राजस्व अभिलेखागार में जमा करा दें. सरकार ने लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनके दस्तावेज का पूरा सम्मान और संरक्षण किया जाएगा. विभाग सिर्फ इसकी स्कैनिंग और डिजिटाइजेशन करेगा और डिजिटल कॉपी तैयार होते ही ओरिजिनल कॉपी सुरक्षित रूप से रैयत को वापस लौटा दी जाएगी.
बाढ़ प्रभावित जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान
बिहार में कैडेस्टल सर्वे का काम साल 1900 से 1910 के बीच हुआ था. आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल गांवों या मौजों की संख्या 45103 है, जिनमें से 9334 गांवों के कैडेस्टल खतियान अनुपलब्ध या नष्ट हो चुके हैं. इसका सीधा मतलब यह है कि राज्य के करीब 20 फीसदी गांवों का पुराना भूमि रिकॉर्ड सरकारी दफ्तरों में नहीं है.
सहरसा, पूर्णिया, अररिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण ऐसे जिले हैं, जहां के दो सौ से अधिक गांवों के खतियान गायब हैं. इनमें से ज्यादातर वो इलाके हैं जो हर साल भीषण बाढ़ का सामना करते हैं, और माना जा रहा है कि बाढ़ के पानी और नमी के कारण ही ये सरकारी दस्तावेज नष्ट हुए हैं.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
विशेष भूमि सर्वे में मिलेगी मदद
अधिकारियों का कहना है कि अगर लोगों के सहयोग से ये पुराने खतियान मिल जाते हैं, तो वर्तमान में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण के दौरान जमीन के असली मालिक का निर्धारण करने और सीमाओं को तय करने में बहुत बड़ी सुविधा होगी. कैडेस्टल सर्वे के बाद राज्य में 1952 से 1960 के बीच रिविजनल सर्वे हुआ था और 1967 में भी एक छिटपुट कोशिश की गई थी, लेकिन वह रफ्तार नहीं पकड़ सकी थी.
इस समय पूरे बिहार में बड़े पैमाने पर विशेष भूमि सर्वेक्षण का काम चल रहा है. राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने दावा किया है कि इस काम में तेजी लाई जा रही है और अगले साल यानी मार्च तक पूरे राज्य में भूमि सर्वे की प्रक्रिया को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा.
इसे भी पढ़ें: 26, 27, 28 जून को बिहार के इन जिलों में रहेगा आंधी-तूफान, वज्रपात और बारिश का दौर, IMD का डबल अलर्ट
