Bihar Weather: बिहार को गुलाबी ठंड का इंतजार, चार साल में इस बार सबसे गर्म रहा मौसम

Bihar Weather: बिहार में नवंबर महीने में भी लोग गर्मी से परेशान हैं. सभी ठंड का इंतजार कर रहे हैं. मौसम विभाग के मुताबिक मौसम में हो रहे बदलाव की वजह ग्लोबल वार्मिंग है.

Bihar Weather: बिहार में नवंबर महीने में भी गुलाबी ठंड का एहसास नहीं हो रहा है. अधिकतम और न्यूनतम तापमान औसत से ज्यादा बना हुआ है. धूप की वजह से दिन में पसीना हो रहा है. लोग अभी भी फैन और एसी यूज कर रहे हैं. मौसम विभाग ने बताया है कि पिछले चार साल की तुलना में इस बार तापमान अधिक रिकॉर्ड किया गया है. नार्थ-वेस्ट हवा चलने की वजह से राज्य में ठंड की शुरुआत होती है. इस बार यह हवा नहीं चली है इस कारण अभी तक लोग गर्मी से परेशान हो रहे हैं.

चार साल में इस साल का मौसम गर्म रहा

बिहार में जून से सितंबर तक बारिश का महीना माना जाता है. इसके बाद धीरे-धीरे ठंड की दस्तक शुरू हो जाती है. नवंबर के पहले सप्ताह के बाद आम तौर पर इतनी ठंड रहती है कि लोगों को हल्के गर्म कपड़ों की जरूरत पड़े. लेकिन इस साल बदलाव देखा जा रहा है. आइएमडी के मुताबिक पिछले चार साल में इस सबसे ज्यादा तापमान दर्ज किया जा रहा है. बुधवार को दिन में हवा नहीं चली जिस वजह से लोग गर्मी से परेशान दिखे.

क्या होती है गुलाबी ठंड

सर्द ऋतु शुरू होने से पहले पड़ने वाली हल्की ठंड को गुलाबी ठंड कहते हैं. इसी प्रकार सर्द ऋतु समाप्त होने पर जो हल्की ठंड पड़ती है उसे भी गुलाबी ठंड ही कहा जाता है. गुलाबी ठंड शरीर को तो अच्छी लगती है, लेकिन मौसम में परिवर्तन के कारण इस समय बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ते हैं. डॉक्टर्स के मुताबिक ऐसे मौसम में हमें स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए.

पिछले चार साल में 13 नवंबर का तापमान

वर्ष अधिकतम न्यूनतम
2024 31.8 18.8
2023 30.2 16.8
2022 29.8 14.2
2021 29.5 12.4

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लेखक के बारे में

Author: Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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