Bihar News: बिहार में बालू खनन को लेकर सरकार ने नियम और कड़े कर दिए हैं. अब बालू घाटों के बंदोबस्तधारियों को सिर्फ बंदोबस्ती राशि जमा करने से काम नहीं चलेगा. यदि किसी घाट से तय मात्रा से अधिक बालू का खनन किया जाता है, तो उसके लिए अतिरिक्त स्वामित्व राशि भी सरकार को देनी होगी.
खनन विभाग ने नई नियमावली लागू होने के बाद सभी जिलों को अतिरिक्त स्वामित्व की गणना करने का निर्देश जारी कर दिया है. माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी और बालू घाटों के संचालन में पारदर्शिता भी आएगी.
वार्षिक खनन की होगी गणना
नई व्यवस्था के तहत बालू घाटों से निकाले गए खनिज की वार्षिक आधार पर गणना की जाएगी. यदि निकाले गए बालू की स्वामित्व राशि, बंदोबस्ती के समय तय राशि से अधिक पाई जाती है, तो अंतर की रकम बंदोबस्तधारी को अतिरिक्त रूप से जमा करनी होगी. सरकार का मानना है कि इससे खनन की वास्तविक मात्रा का आकलन आसान होगा और राजस्व नुकसान को रोका जा सकेगा.
2026 की नई नियमावली के बाद बड़ा बदलाव
राज्य सरकार ने बिहार खनिज (समानुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू की है. 6 मई 2026 से प्रभावी इस नियमावली में बालू घाटों के संचालन और स्वामित्व भुगतान से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं. नई व्यवस्था में प्रत्यार्पित बालू घाटों के लिए सुरक्षित जमा राशि तय करने के साथ-साथ स्वामित्व दरों में भी संशोधन किया गया है.
अवैध खनन पर लगेगी लगाम
खनन विभाग का मानना है कि नए नियम लागू होने से अवैध खनन और कम स्वामित्व राशि जमा करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा. साथ ही सरकार को खनन से मिलने वाले राजस्व का सही आकलन भी हो सकेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था बालू कारोबार में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
सभी जिलाधिकारियों को जारी हुआ निर्देश
खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर अपने-अपने जिलों में अतिरिक्त स्वामित्व राशि की गणना जल्द पूरी कराने का निर्देश दिया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि जहां अतिरिक्त देय राशि की पुष्टि होगी, वहां संबंधित बंदोबस्तधारी से राशि वसूल कर खनन मद में जमा कराई जाएगी. इसकी निगरानी विभागीय मुख्यालय स्तर से भी की जाएगी.
सरकार को होगा फायदा, बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद खनन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, राजस्व संग्रह में इजाफा होगा और बालू घाटों के संचालन पर निगरानी और मजबूत होगी. वहीं, घाट संचालकों को अब तय सीमा से अधिक खनन करने पर अतिरिक्त भुगतान के लिए भी तैयार रहना होगा.
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