बिहार में सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा पर लगेगी रोक, अब अफसर-मंत्री करेंगे ‘बिहार दर्शन’, जानिए गवर्नमेंट का प्लान

Bihar News: सम्राट सरकार अफसरों, मंत्रियों और कर्मचारियों को परिवार के साथ बिहार के पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराने के लिए ‘बिहार दर्शन’ योजना शुरू करने जा रही है. सरकार का मकसद लोकल टूरिज्म को बढ़ावा देना है.

Bihar News: बिहार सरकार जल्द ही मंत्रियों और अधिकारियों की सरकारी खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं पर रोक लगाने जा रही है. सूत्रों के मुताबिक यह प्रतिबंध शुरुआती तौर पर अगले 6 महीने तक लागू रह सकता है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर इसको लेकर आदेश का मसौदा लगभग तैयार कर लिया गया है और जल्द ही आधिकारिक घोषणा हो सकती है.

सरकार के इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने वैश्विक हालात और ऊर्जा संकट को देखते हुए पेट्रोल बचत और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से परहेज करने की बात कही थी. बिहार सरकार ने इस संदेश को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव शुरू कर दिए हैं.

सम्राट चौधरी ने छोटा किया अपना काफिला

प्रधानमंत्री की अपील के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद अपने काफिले को सीमित कर दिया. अब उनके काफिले में सिर्फ 3 गाड़ियां रहेंगी. एक गाड़ी मुख्यमंत्री के लिए और आगे-पीछे दो गाड़ियां सुरक्षा व जरूरी स्टाफ के लिए होंगी. राजभवन ने भी इसी तर्ज पर कदम उठाया है.

इसके अलावा मंत्रियों और अफसरों के लंबे काफिलों पर भी लगाम लगाई गई है. सरकार ने ‘नो व्हीकल डे’ मनाने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठकें करने और ‘वर्क फ्रॉम होम’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. विदेश यात्रा पर रोक को इसी अभियान की अगली कड़ी माना जा रहा है.

अफसर-कर्मी परिवार के साथ घूमेंगे बिहार

विदेश यात्रा पर रोक के साथ ही बिहार सरकार ने एक नई योजना ‘बिहार दर्शन’ शुरू करने का फैसला लिया है. इसके तहत सरकारी अफसर, मंत्री और कर्मचारी अपने परिवार के साथ बिहार के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे.

सरकार चाहती है कि अधिकारी और कर्मचारी राज्य के पर्यटन स्थलों को करीब से देखें, वहां की सुविधाओं को समझें और सुधार के सुझाव दें. इस पहल का मकसद ‘लोकल फॉर वोकल’ को बढ़ावा देना और बिहार में पर्यटन गतिविधियों को मजबूत करना है.

हर तीन महीने में करनी होगी यात्रा

योजना के मुताबिक अफसरों और कर्मचारियों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार शुक्रवार और शनिवार को किसी पर्यटन स्थल पर जाना होगा. उन्हें वहां रात्रि विश्राम भी करना पड़ेगा. सरकार तय टीए-डीए देगी, जबकि बाकी खर्च संबंधित अधिकारी या कर्मचारी खुद वहन करेंगे. खास बात यह है कि यात्रा अपने गृह जिले से बाहर करनी होगी, ताकि राज्य के अलग-अलग पर्यटन स्थलों का अनुभव मिल सके.

तीन पर्यटन स्थलों का भ्रमण जरूरी

सरकारी निर्देशों के अनुसार कर्मचारियों को कम से कम तीन पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना होगा. यात्रा के दौरान ली गई तस्वीरें और अनुभव विभाग के साथ शेयर करना अनिवार्य रहेगा. इसके अलावा यात्रा के बाद एक विस्तृत प्रतिवेदन भी देना होगा, जिसमें वहां की सुविधाओं, समस्याओं और सुधार के सुझाव शामिल होंगे. इन सुझावों को जुटाने के लिए अलग से नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे.

होम स्टे और ईको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों को होम स्टे और ईको टूरिज्म को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है. इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी और छोटे कारोबारियों को फायदा होगा. पर्यटन विभाग सभी स्थलों की जानकारी और सुविधाओं को वेबसाइट पर अपलोड करेगा, ताकि यात्रियों को आसानी से जानकारी मिल सके.

सरकार को क्या होगा फायदा?

सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से बिहार में लोकल टूरिज्म तेजी से बढ़ेगा. जब सरकारी कर्मचारी खुद पर्यटन स्थलों का अनुभव साझा करेंगे, तो दूसरे लोग भी वहां घूमने के लिए प्रेरित होंगे. इस योजना से स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और छोटे व्यवसायों को सीधा फायदा मिलने की संभावना है. साथ ही अफसरों के सुझाव के आधार पर पर्यटन सुविधाओं में सुधार भी किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे बिहार का पैसा बिहार में ही खर्च होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

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Published by: Abhinandan Pandey

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