Bihar News: बिहार में गंभीर अपराध कर विदेशों में छिपे अपराधियों के खिलाफ अब बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है. हत्या, साइबर ठगी, ड्रग्स तस्करी और आर्थिक अपराध जैसे मामलों में विदेश भागने वाले अपराधियों को पकड़ने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग इकाई यानी IPCU ने विशेष फोकस ग्रुप बनाया है. इस टीम का काम ऐसे अपराधियों की पहचान करना, उनकी लोकेशन ट्रेस करना और उन्हें भारत वापस लाने की प्रक्रिया को तेज करना होगा.
बिहार पुलिस मुख्यालय ने जिलों से मांगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिहार पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को अलर्ट कर दिया है. सीआईडी के जरिए जिलों से उन अपराधियों की सूची मांगी गई है, जो संगीन मामलों में शामिल होने के बाद देश छोड़कर विदेशों में छिपे हुए हैं.
पुलिस से सिर्फ नाम और पता ही नहीं, बल्कि अपराधियों से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी मांगी गई है. इसमें पिता का नाम, जन्मतिथि, पासपोर्ट नंबर, पासपोर्ट की स्थिति, फोटो, दर्ज केस और एफआईआर की कॉपी शामिल है. जहां संभव होगा, वहां फिंगरप्रिंट और अन्य बायोमेट्रिक डेटा भी लिया जाएगा.
चार श्रेणियों में बांटे जाएंगे अपराधी
आईपीसीयू ने फरार अपराधियों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटा है.
- आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़े अपराधी
- ड्रग्स तस्करी करने वाले नेटवर्क
- बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध
- साइबर क्राइम और मानव तस्करी से जुड़े आरोपी
इन सभी अपराधियों का एक बड़ा डेटाबेस तैयार किया जाएगा.
इंटरपोल और विदेशी एजेंसियों की भी ली जाएगी मदद
केंद्रीय एजेंसियां इस मास्टर डेटाबेस को इंटरपोल और दूसरे देशों की पुलिस एजेंसियों के साथ साझा करेंगी. जैसे ही किसी अपराधी की लोकेशन विदेश में मिलेगी, भारत सरकार प्रत्यर्पण संधियों के तहत उसे वापस लाने की प्रक्रिया शुरू करेगी. अधिकारियों का कहना है कि इससे विदेशों में बैठकर अपराध करने वाले नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ेगा.
बिहार के कई जिलों में सामने आए हैं ऐसे मामले
हाल के वर्षों में बिहार के कई जिलों में साइबर ठगी और आर्थिक अपराध के ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनके तार विदेशों से जुड़े मिले हैं. भागलपुर, पटना और सीवान जैसे जिलों में हुई साइबर ठगी की जांच में पता चला कि कई आरोपी खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में बैठकर गिरोह चला रहे थे.
भागलपुर में बैंक मैनेजर और एक बुजुर्ग से 2.31 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में भी विदेशी नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी.
अपराध के बदलते तरीके से निपटने की तैयारी
अधिकारियों का कहना है कि अब अपराध सिर्फ एक राज्य या देश तक सीमित नहीं रह गया है. तकनीक और डिजिटल नेटवर्क के जरिए अपराधी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हो चुके हैं.
ऐसे में बिहार पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का यह संयुक्त अभियान कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. उम्मीद है कि इससे फरार अपराधियों की गिरफ्तारी तेज होगी और विदेशों में बैठकर अपराध करने वाले गिरोहों पर लगाम लगेगी.
