Bihar Elections 2025: नाव से नदी पार कर पहुंचे मतदाता, बिहपुर में कठिन रास्तों के बीच लोकतंत्र का जज्बा लहराया
Bihar Elections 2025: नदी, दलदल और जलभराव के बावजूद जब लोग नाव से पार कर मतदान केंद्र पहुंचे, तो लगा लोकतंत्र की सबसे सुंदर तस्वीर यहीं खिंच रही है.
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण में भागलपुर जिले के बिहपुर विधानसभा क्षेत्र ने एक अद्भुत मिसाल पेश की. यहां के अठगामा और दियारा इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को चुनौती देते हुए नाव से नदी पार की और अपने मताधिकार का प्रयोग किया. लोकतंत्र के इस पर्व में इन मतदाताओं का उत्साह देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि जहां चाह, वहां राह.
नदी पार, वोट तक का सफर — लोकतंत्र की नाव पर सवार मतदाता
सुबह की पहली किरण के साथ ही अठगामा और दियारा शहजादपुर गांवों के मतदाता नावों पर सवार होकर नदी पार करते दिखे. जिन रास्तों पर जलभराव और कीचड़ फैला था, वहां भी ग्रामीण समूहों में निकल पड़े, सिर्फ वोट देने के लिए.
मध्य विद्यालय चौहदी मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र साधन था, लेकिन मतदाताओं ने इसे बाधा नहीं बनने दिया. बुजुर्ग हों या महिलाएं, सबने एक स्वर में कहा “लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा लेना हमारा अधिकार और कर्तव्य दोनों है.”
“हर चुनाव में नाव ही रास्ता है, पर हिम्मत कभी नहीं टूटी”
स्थानीय मतदाता रामप्रवेश यादव बताते हैं “हमारे गांव में हर बार चुनाव के वक्त यही हाल रहता है. नाव से जाना पड़ता है, लेकिन इससे उत्साह कभी कम नहीं होता. हम जानते हैं कि वोट देना जरूरी है.”
गांव के कई बुजुर्गों और महिलाओं ने बच्चों के साथ नाव में बैठकर नदी पार की. नावें मतदाताओं से भरी थीं और सभी के चेहरे पर जिम्मेदारी का भाव झलक रहा था.
940 मतदाताओं का ‘नदी-पैदल-फिर नदी’ वाला सफर
गोलोक कोडर ग्राम पंचायत के मजर, पचीसा, बरार, कोनी और मेड़ई पूरी तरह नदी के पार बसे हैं. यहां के लगभग 940 मतदाता पहले शारदा नदी पार करते हैं, फिर दो किलोमीटर पैदल चलकर घाघरा नदी पार कर अपने मतदान केंद्र तक पहुंचते हैं.
यह यात्रा आसान नहीं, लेकिन लोकतंत्र के प्रति इन लोगों की आस्था इसे संभव बनाती है. नाव से उतरने के बाद पैदल कीचड़ भरे रास्तों पर चलना और फिर दूसरी नदी पार करना यह सब सिर्फ इसलिए ताकि वे कह सकें, “हमने वोट दिया.”
प्रशासन ने की नाव और सुरक्षा की व्यवस्था
स्थानीय प्रशासन की ओर से नावों और सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी. मतदान केंद्रों तक जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बल तैनात थे. बीडीओ और ब्लॉक अधिकारियों ने खुद नावों की निगरानी की ताकि कोई मतदाता मतदान से वंचित न रह जाए.
बिहपुर बना लोकतंत्र का प्रतीक
बिहपुर का दियारा इलाका कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाला है, जहां जलभराव और नदियों के बीच बसे गांव अक्सर बाकी इलाके से कट जाते हैं. लेकिन मंगलवार को जब नावों में बैठकर मतदाता एक-एक कर वोट डालने पहुंचे, तो यह नजारा लोकतंत्र के असली अर्थ को परिभाषित करता दिखा.
यह सिर्फ वोट नहीं था, यह उस विश्वास का प्रदर्शन था जो बिहार के ग्रामीण आज भी लोकतंत्र में रखते हैं कि चाहे रास्ते नदी से हों या कीचड़ से, मतदान का फर्ज निभाना सबसे बड़ा कर्तव्य है.
